Monday, 19 November 2018

चेरापूंजी हिल स्टेशन: बादलों से दोस्ती

   चेरापूंजी हिल स्टेशन की इन्द्रधनुषी सुन्दरता का कोई जोड़ नहीं। शायद इसी लिए चेरापूंजी हिल स्टेशन देश के चुनिंदा हिल स्टेशन में गिना जाता है। 

  मेघालय के उत्तरी-पूर्व इलाका का यह हिल स्टेशन अपनी भव्यता-दिव्यता के साथ ही सुरम्यता के लिए भी खास ख्याति रखता है। चेरापूंजी हिल स्टेशन हमेशा बादलों की धंुध से सराबोर रहता है। लिहाजा एक शांत एवं शीतल परिवेश रहता है। 

   समुद्र तल से करीब 1484 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन खास तौर से मानसून की विलक्षणता के लिए जाना पहचाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो चेरापूंजी हिल स्टेशन की दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान है। 

   मानसून के साथ ही बादलों का खिलंदड़पन चेरापूंजी में खास है। आश्चर्यजनक यह कि चेरापूंजी में बारिश अधिसंख्य रात के समय में होती है। चेरापूंजी को सोहरा भी कहा जाता है। चेरापूंजी वस्तुत: शिलांग से करीब 53 किलोमीटर दूर स्थित है। 

    चेरापूंजी हिल स्टेशन अपनी आगोश में बादलों का खिलंदड़पन रखता है तो झीलों-झरनों की भी एक लम्बी श्रंखला है। बांग्लादेश की सीमा के निकट होने के कारण चेरापूंजी हिल स्टेशन से बांग्लादेश की सुन्दरता एवं विहंगमता का अवलोकन पर्यटक कर सकते हैं।

   चेरापूंजी हिल स्टेशन के निकट ही नोहकालीकाई झरना है। इस झरना की सुन्दरता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। यहां प्राचीन एवं सुन्दर गुफाओं की एक श्रंखला है। इन गुफाओं का प्राचीन सौन्दर्य देखते ही बनता है। इनमें कुछ तो कई किलोमीटर लम्बी गुफाएं हैं। 

   वस्तुत: चेरापूंजी हिल स्टेशन खासी जनजातीय बाहुल्य इलाका है। विशेषज्ञों की मानें तो चेरापूूंजी का प्राचीन नाम सोहरा है। जिसे बदल कर चेरापूंजी कर दिया गया था। 
  अब एक बार फिर चेरापूंजी को बदल कर सोहरा कर दिया गया है। चेरापूंजी हिल स्टेशन एरिया में डेविड स्कॉट का एक स्मारक भी बेहद दर्शनीय है।

   चेरापूंजी में विवाह की अपनी एक अलग विशेष परम्परा है। इस वैवाहिक परम्परा में परिवार की सबसे छोटी बेटी ही सम्पत्ति की वास्तविक वारिस होती है। 
  चेरापूूंजी हिल स्टेशन घुंघराली पर्वत श्रंखला एवं बादलों की धमाचौकड़ी के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है।

    घुमावदार बादलों से घिरा चेरापूंजी हिल स्टेशन सुन्दरता का इन्द्रधनुषी रंग बिखेरता है। जिससे पर्यटक मोहित हो उठते हैं। चौतरफा वनस्पतियों से आच्छादित परिवेश एक खुशनुमा वातावरण पैदा करते हैं। 

   चेरापूंजी के पुल प्राकृतिक एवं पारम्परिक होते हैं। मजबूती भी बेमिशाल होती है। पेड़ के जड़ों के जुड़ाव से बनने वाले यह लघु पुल दर्शनीय होते हैं। साथ ही यह लोक विकास का हिस्सा होते हैं। इस विधि एवं तकनीकि से पुल बनाने में 10 से 15 वर्ष का समय लगता है। 

   आश्चर्यजनक है कि चेरापूंजी में सर्वाधिक बारिश होती है। बारिश ने चेरापूंजी को देश दुनिया का सबसे पसंदीदा शहर एवं हिल स्टेशन बना दिया। चेरापूंजी हिल स्टेशन को बारिश के लिए गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकाड्र्स में शामिल किया गया है। 
   यूं कहना चाहिए कि चेरापूंजी हिल स्टेशन प्राचीन सुन्दरता, असामान्य पहलुओं, शाश्वत बादलों एवं प्राकृतिक सुन्दरता का विलक्षण आयाम है। 

    चेरापूंजी हिल स्टेशन वस्तुत: बादलों का निवास स्थान है। चेरापूंजी में कहीं भी कभी भी बादलों का एहसास किया जा सकता है। चेरापूंजी हिल स्टेशन एवं आसपास दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला है। 

   इनमें खास तौर से मासस्मा गुफा, क्रेम माल्मलह गुफा, नोक्कलिकाई वॉटर फॉल्स, सात बहनों का फॉल्स, डेन्थलेन फॉल्स, क्रेम फिलेट, थांगखारंग पार्क, इको पार्क, मावलिनांग, खासी मोनोलिथ्स एवं नेशनल पार्क आदि इत्यादि बहुत कुछ है।
   नेशनल पार्क: नेशनल पार्क वस्तुत: वनस्पतियों की प्रचुरता एवं विविधिता वाला पार्क है। इसे संजीवनी पार्क भी कहा जा सकता है। कारण पार्क का परिवेश स्वास्थ्यवर्धक है।
   मासस्मा गुफा: मासस्मा गुफा प्राचीन गुफा है। पर्यटक यहां रोमांच का अनुभव करते हैं। प्रकृति का यह अद्भुत आयाम है।
   सात बहनों का फॉल्स: सात बहनों का फॉल्स वस्तुत: एक विहंगम वॉटर फॉल्स है। करीब 1033 फुट की ऊंचाई से गिरने वाला यह वॉटर फॉल्स एक विशेष ध्वनि उत्पन्न करता है। फॉल्स करीब 70 मीटर चौड़ा है।
   चेरापूंजी हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गुवाहाटी है। गुवाहाटी एयरपोर्ट से चेरापूंजी हिल स्टेशन की दूरी करीब 181 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी चेरापूंजी हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
25.572490,91.310760

Thursday, 15 November 2018

चैल हिल स्टेशन: धरती का श्रंगार

    चैल हिल स्टेशन को धरती का श्रंगार कहा जाना चाहिए। जी हां, चैल हिल स्टेशन की खूबसूरती देख कर कहा जा सकता है कि दुनिया का सबसे खूबसूरत स्थान है।

   हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला स्थित यह हिल स्टेशन प्राकृतिक सुन्दरता का श्रेष्ठतम आइना है। चौतरफा मखमली घास के मैदान-ढ़लान यहां की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। चैल हिल स्टेशन पर बर्फबारी का अपना एक अलग ही आनन्द एवं रोमांच है। 

   सर्दियों के मौसम में चौतरफा बर्फ की चादर दिखती है। बर्फ का गिरना एक सिहरन एवं रोमांच पैदा करता है। समुद्र तल से करीब 2226 मीटर ऊंचाई पर स्थित चैल हिल स्टेशन पर वनस्पतियों की प्रचुरता परिवेश को अत्यधिक ऊर्जावान बना देती है।

   खास यह कि चैल का क्रिकेट मैदान एवं पोलो मैदान विश्व प्रसिद्ध है। इसका सबसे बड़ा कारण चैल का यह क्रिकेट एवं पोलो मैदान दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर है।
   चैल का यह मैदान समुद्र तल से करीब 2444 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। चैल हिल स्टेशन वन्य जीव प्रेमियों के लिए भी खास है। 

    कारण वन्य जीव अभ्यारण में विलुप्त प्रजातियों के जीव जंतु भी स्वच्छंद विचरण करते दिखते हैं। वनस्पतियों एवं विभिन्न प्रजाति के फूलों की सुगंध चैल के परिवेश को बेहद सुहाना बना देती हैं। सध टिब पर्वत श्रंखला पर स्थित चैल हिल स्टेशन देश के सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक है।

   खास यह कि चैल की सुन्दरता से प्रभावित हो कर राजा भूपिन्दर सिंह ने चैल को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था। पटियाला के राज परिवार ने चैल में चैल महल का 1891 में निर्माण कराया था।
   चैल महल वस्तुत: चैल की शाही विरासत है। चैल हिल स्टेशन एवं उसके आसपास आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। चैल सैन्य पाठशाला के अलावा यहां गुरुद्वारा साहिब, काली जी का मंदिर टिब्बा आदि इत्यादि बहुत कुछ है।

   चैल हिल स्टेशन ट्रैकिंग एवं फिशिंग का पसंदीदा क्षेत्र है। शिवालिक पर्वत श्रंखला से घिरा चैल हिल स्टेशन देवदार एवं पाइन के सुन्दर वृक्ष श्रंखला से घिरा हुआ है।
    चैल हिल स्टेशन शांत एवं शीतलता के लिए विशेष तौैर से जाना पहचाना जाता है। चैल हिल स्टेशन से चौतरफा सुन्दर परिदृश्य का अवलोकन किया जा सकता है।
   चैल से खास तौर से शिमला, सोलन एवं कसौली की सुन्दरता दिखती है। रात में तो यह दृश्य बेहद खुशनुमा प्रतीत होता है।

    चैल हिल स्टेशन एवं आसपास के आकर्षक स्थानों में खास तौर से काली मंदिर, राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, वन्य जीव अभ्यारण, लवर प्वाइंट, स्टोन कुम्भ आदि हैं।
   काली टिब्बा मंदिर: काली टिब्बा मंदिर वस्तुत: चैल का श्रेष्ठतम धार्मिक स्थान है। मुख्यत: यह मंदिर काली जी को समर्पित है। 

   यह मंदिर चैल की एक पहाड़ी पर स्थित है। यह स्थान दुनिया के पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। शिवालिक पर्वत श्रंखला का यह एक सुन्दर स्थान है।
  राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय: राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय शिक्षा का एक बेहतरीन स्थान है। विशेषज्ञों की मानें तो देश के पांच सैन्य विद्यालय में से यह एक है। यहां करीब 300 कैडेट्स शिक्षा ग्रहण करते हैं। 
   चैल वन्य जीव अभ्यारण: चैल वन्य जीव अभ्यारण करीब 10854.36 हेक्टेयर में फैला है। अभ्यारण में तेंदुआ, कलगीदार साही, जंगली सुअर, गोरल, यूरोपियन लाल हिरण, काकर, सांभर, लाल जंगली पक्षी, खलीज, जयकार, फीसेंट आदि प्रवास करते हैं। 
  साधुपुल: साधुपुल वस्तुत: साधुपुर का सुन्दर मार्ग है। साधुपुर चैल एवं सोलन के बीच बसा एक सुन्दर गांव है। अश्वनी नदी पर बने इस पुल की विशिष्टताएं हैं। साधुपुर में वॉटर पार्क एवं एक कैफे भी है। 
   क्रिकेट एवं पोलो मैदान: क्रिकेट एवं पोलो मैदान का निर्माण महाराजा भूपिन्दर सिंह ने 1893 में कराया था। महाराजा स्वयं क्रिकेट प्रेमी थे। यह स्थान समुद्र तल से करीब 2444 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।
    लवर प्वाइंट: लवर प्वाइंट चैल से करीब 10 किलोमीटर दूर है। इस स्थान को आगंतुक जुंगा भी कहते है। लवर प्वाइंट बेहद शांत एवं सुन्दर स्थान है।
   चैल हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जुबरहट्टी शिमला है। जुबरहट्टी एयरपोर्ट से चैल हिल स्टेशन की दूरी करीब 72 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कालका है। कालका रेलवे स्टेशन से चैल हिल स्टेशन की दूरी करीब 81 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी चैल हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
30.967621,77.191650

Tuesday, 13 November 2018

नारकंडा हिल स्टेशन : रोमांच का एहसास

   नारकंडा हिल स्टेशन को प्रकृति का सुन्दर उपहार कहा जाना चाहिए। जी हां, नारकंडा हिल स्टेशन की सुन्दरता का इन्द्रधनुषी रंग किसी को भी मोेह लेता है।

   हिमाचल प्रदेश के लघु शहर नारकंडा स्थित यह हिल स्टेशन प्राकृतिक सुन्दरता से लबरेज है। समुद्र तल से करीब 2708 मीटर ऊंचाई पर स्थित नारकंडा हिल स्टेशन पर प्रकृति का हर रंग दिखता है। 

   चौतरफा मखमली घास के हरे-भरे मैदान एक सुखद एहसास कराते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे देवलोक में विचरण कर रहे हों। हिमाचल प्रदेश के तिब्बत रोड स्थित यह हिल स्टेशन पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र रहता है। शिवालिक पर्वत श्रंखला से घिरा यह हिल स्टेशन पर्यटकों के लिए कुछ खास होता है। 

   सर्दियों में नारकंडा में स्कीइंग के मजे ही कुछ आैर होते हैं। कारण सर्दियों में बर्फबारी का नजारा देखने वाला होता है। मखमली घास के सुन्दर मैदान मन को मोह लेते हैं। पर्वत मालाओं पर बर्फ की चादर स्वप्नलोक की संरचनाओं को साकार करती दिखती है। 

   बाग-बगीचों की संस्कृति वाला यह इलाका वनसम्पदाओं से भी आच्छादित है। खास तौर से वनस्पतियों की प्रचुरता पर्यटकों को भरपूर आक्सीजन प्रदान करती है। 

   यूं कहें कि वनस्पतियों की प्रचुरता से फेफड़ों को पंख लग जाते हैं। खास यह कि नारकंडा हिल स्टेशन सेब की खूशबू से महकता रहता है। इस इलाके में सेब संस्कृति प्रारम्भ करने का श्रेय सत्यनंद स्टोक्स को है। यहां की मुख्य अर्थव्यवस्था सेब उत्पादन पर आधारित है। 

   बर्फबारी के बीच नारकंडा का जनजीवन बेहद रोमांचकारी होता है। मौसम का हर पहलु यहां एक सुखद एहसास कराता है। मौसम चाहे गर्मी का हो या फिर सर्दियां हों। बर्फबारी का आनन्द लेना हो तो नारकंडा हिल स्टेशन बेहतरीन है। 

   खास यह कि अक्टूबर से फरवरी तक शहर एवं हिल स्टेशन बर्फ से आच्छादित रहता है। तापमान भी कई बार शून्य से नीचे चला जाता है। नारकंडा हिल स्टेशन का एक बड़ा इलाका वन आधारित है।
   वन क्षेत्र में खास तौर से कॉनिफर, ऑक, मेपल, पापुलस, एस्कुलस, कोरीलस एवं होली आदि प्रजातियों की वृक्ष श्रंखला है। 

   खास तौर से नारकंडा हिल स्टेशन से चौतरफा हिमालय की सुन्दरता का शानदार अवलोकन किया जा सकता है। शिमला से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित नारकंडा हिल स्टेशन में एक सुरम्य एवं शांत परिवेश रहता है। 
  सेब के साथ ही आड़ू के बागान भी सुन्दरता को बढ़ाते हैं। झीलों-झरनों की श्रंखला नारकंडा की सुन्दरता में चार चांद लगा देते हैं। 

   हटू चोटी: हटू चोटी को नारकंडा हिल स्टेशन का एक सुन्दर नगीना कहा जा सकता है। समुद्र तल से करीब 12000 फुट की ऊंचाई पर स्थित हटू इलाके की सबसे ऊंची पर्वत श्रंखला है। देवदार वृक्ष श्रंखला से घिरा यह इलाका पर्यटकों के लिए विशेष है। 

   ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे हर रंग से परिवेश ढ़का हो। हटू चोटी को धरती का शानदार गहना कहा जा सकता है। पेड़ों पर आच्छादित लाल रंग के चमकदार सेब पर्यटकों को खास तौर से लालायित करते हैं।
   हटू माता मंदिर यहां का विशेष आकर्षण है। हटू माता मंदिर मुख्यत: प्रकांड पंडित रावण की पत्नी मंदोदरी को समर्पित है। इसका यहां विशेष धार्मिक महत्व है। चौतरफा फैले अल्पाइन के वृक्ष बेहद सुन्दर प्रतीत होते है।

  इस पर्वत चोटी का ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। प्राकृतिक अद्भुत संरचनाओं का यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आदर्श है।
   स्कीइंग: नारकंडा हिल स्टेशन स्कीइंग के लिए विशेष माना जाता है। कारण अक्टूबर से फरवरी तक चौतरफा बर्फ का साम्राज्य दिखता है। घना वन क्षेत्र एवं सेब बागानों की सुगंध मन मस्तिष्क को एक विशेष ताजगी प्रदान करती है। पर्यटक स्कीइंग का रोमांचक अनुभव यहां प्राप्त कर सकते हैं। कुछ यूं भी कह सकते हैं कि नारकंडा हिल स्टेशन स्वास्थ्य संजीवनी है।

  नारकंडा हिल स्टेशन यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भुंतर है। भुंतर एयरपोर्ट से नारकंडा हिल स्टेशन की दूरी करीब 82 किलोमीटर है। 
  निकटतम रेलवे स्टेशन शिमला है। शिमला रेलवे स्टेशन से नारकंडा हिल स्टेशन की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नारकंडा हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
31.320450,77.440060

Tuesday, 6 November 2018

नैना पीक : पर्वतीय सुन्दरता

   नैना पीक की सुन्दरता का कोई जोड़ नहीं। जी हां, नैना पीक उत्तराखण्ड का अति विशिष्ट एरिया है। उत्तराखण्ड के नैनीताल स्थित नैना पीक आसपास के पर्वतीय क्षेत्र का विहंगम दृश्य का अवलोकन कराता है। 

   नैना पीक को चीना चोटी भी कहते हैं। नैना पीक के नाम से प्रसिद्ध यह पर्वतीय चोटी उत्तराखण्ड का मुख्य पर्यटन क्षेत्र है। समुद्र तल से करीब 2611 मीटर ऊंचाई पर स्थित नैना पीक वस्तुत: नैनीताल से करीब 6 किलोमीटर दूर है। 

    इस पर्वतीय चोटी तक पहंुचने के लिए पर्यटकों को पैदल यात्रा करनी होती है। नैना पीक के चौतरफा मखमली घास के मैदान-ढ़लान परिवेश को आैर भी अधिक खूबसूरत बनाते हैं।

   सुन्दर एवं सघन वन क्षेत्र से गुजरने वाला नैना पीक का यह मार्ग बेहद दर्शनीय है। बुरांश, देवदार एवं साइप्रस का घना वन क्षेत्र नैना पीक की सुन्दरता में चार चांद लगा देता है। विशेषज्ञों की मानें तो नैना पीक नैनीताल शहर की सर्वाधिक ऊंचाई वाली पर्वतीय चोटी है। 

   नैना पीक से चौतरफा हिम शिखर की सुन्दरता का पर्यटक अवलोकन कर सकते हैं। बर्फ से आच्छादित पर्वत श्रंखला अति सुन्दर प्रतीत होते हैं। नैना पीक से पर्यटक नेपाल की अपि एवं नरी पर्वत चोटियों की सुन्दरता का अवलोकन किया जा सकता है। यहां से प्रसिद्ध बंदर पूंछ चोटी को भी निहार सकते हैं।

   नैना पीक से चौतरफा सुन्दरता का विहंगम दृश्य देख सकते हैं। नैनीताल शहर की सुन्दरता का 'बर्ड आई व्यू" बेहद दर्शनीय प्रतीत होता है। यह इलाका ट्रैकिंग के लिए भी बेहतरीन है। 

   सर्दियों में नैना पीक एवं आसपास स्नो फॉल की निराली छटा बेहद आकर्षक होती है। शांत एवं शीतल परिवेश वाला नैना पीक पर्यटकों को एक विशेष उर्जा प्रदान करता है। 

   नैना पीक में जैसे फेफड़ों को पंख लग जाते हों। लम्बी सैर, ताजा हवा, भरपूर सांस बेहद सुखद एहसास होता है। नैना पीक एक सुन्दर एवं मनोरम स्थल है। पश्चिम में देवपाठा पहाड़ी है। दक्षिण में अयारपाठा पहाड़ी है। 

   चौतरफा घाटियों-वादियों वाला यह इलाका एक जीवंतता एवं भरपूर आक्सीजन प्रदान करता है।
   नैना पीक की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पंत नगर है। पंत नगर एयरपोर्ट से नैना पीक करीब 78 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है।
   काठगोदाम रेलवे स्टेशन से नैना पीक की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से नैनीताल तक वाहन के माध्यम से यात्रा कर सकते हैं। नैनीताल से नैना पीक की यात्रा पैदल करनी होगी।
29.366120,79.459960

Sunday, 4 November 2018

रुद्रनाथ हिल स्टेशन : धरती का आभूषण

   रुद्रनाथ हिल स्टेशन को प्राकृतिक सौन्दर्य का एक शानदार गहना कहना चाहिए। जी हां, रुद्रनाथ हिल स्टेशन का कण-कण प्राकृतिक सुन्दरता से आच्छादित है। 

   रुद्रनाथ वस्तुत: उत्तराखण्ड के चमोली का एक गांव है। समुद्र तल से करीब 2286 मीटर ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ हिल स्टेशन एक शांत एवं शीतल एरिया है। रुद्रनाथ में पर्यटक बर्फबारी का भरपूर एवं अद्भुत आनन्द ले सकते हैं।
   रुद्रनाथ का शाब्दिक आक्रोश करने वाला व्यक्ति होता है। रुद्रनाथ हिल स्टेशन खास तौर रुद्रनाथ मंदिर के कारण जाना-पहचाना जाता है।

   विशेषज्ञों की मानें तो रुद्रनाथ पंचकेदार तीर्थयात्रा का एक स्थान है। रुद्रनाथ का स्थान पंचकेदार में तीसरा है। पंचकेदार सर्किल में केदारनाथ, तुंगनाथ, मध्यमेश्वर एवं कल्पेश्वर हैं।
   रुद्रनाथ हिल स्टेशन में चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की आभा अवलोकित होती है। चौतरफा हिम शिखर का सौन्दर्य अद्भुत दिखता है।

  मखमली घास के मैदान एवं ढ़लान एक सुखद एवं ह्मदयस्पर्शी एहसास कराते हैं। सर्दियों में हिम शिखर बर्फ की चादर ओढ़े नजर आते हैं। बादलों की आवाजाही एक रोमांचक स्पर्श होता है। कारण कभी बादल पर्यटकों की गोद में होते हैं तो कभी पर्यटक बादलों की गोद में होते हैं।

   विशेषज्ञों की मानें तो रुद्रनाथ हिल स्टेशन वस्तुत: भगवान शिव के रुद्र स्वरूप को समर्पित है। चौतरफा सघन वन क्षेत्र एवं वनस्पतियों की सुगंध मन-मस्तिष्क को एक प्रफुल्लता प्रदान करती हैं।
   हिम शिखर की चोटियों से लेकर घाटियों-वादियों तक मखमली घास के साथ सुगंधित फूलों की सुन्दर श्रंखला हर्षातिरेक से भर देती है।

  रुद्रनाथ का इलाका खास तौर से ट्रैकिंग के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। नदियां एवं झीलें यहां की सुन्दरता में चार चांद लगा देती हैं। रुद्रनाथ हिल स्टेशन की यात्रा का सर्वाधिक बेहतरीन समय अप्रैल से नवम्बर की अवधि माना जाता है।
   रुद्रनाथ हिल स्टेशन एवं उसके आसपास सुन्दर एवं आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। रुद्रनाथ मंदिर, पनार बुगियल, जोशीमठ आदि इत्यादि हैं।

   रुद्रनाथ मंदिर: रुद्रनाथ मंदिर वस्तुत: भगवान शिव के रौद्र स्वरुप को समर्पित शिव स्थान है। समुद्र तल से करीब 2286 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।
   कहावत है कि पाण्डव अपने कृत्य एवं पाप के लिए शिव से क्षमा चाहते थे। कारण पाण्डव खुद को कौरवों को मारने का दोषी मानते थे।

   भगवान शिव क्षमा दान के लिए पाण्डवों के सामने नहीं आना चाहते थे। शिव आखिर नंदी का स्वरूप धारण कर कहीं छिप गये थे। इसके बाद शिव का शरीर चार हिस्सों में विभक्त हो गया।
   इन स्थानों को पंचकेदार के नाम से जाना पहचाना जाता है। जिस स्थान पर शिव का सिर पाया गया, उस स्थान को रुद्रनाथ मंदिर का निर्माण किया गया।

   तीर्थयात्री सागर गांव एवं जोशीमठ से ट्रैकिंग के जरिए भी रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा कर सकते हैं। रुद्रनाथ मंदिर से हाथी पर्वत, नंदा देवी, नंदा घुंटी देवी, त्रिशूल पर्वत चोटियों की सुन्दरता का अवलोकन पर्यटक कर सकते हैं। 
  यह इन्द्रधनुषी छटा पर्यटकों को मुग्ध कर देती है। खास यह कि सूर्य कुण्ड, चन्द्र कुण्ड, तार कुण्ड, मानकुण्ड आदि भी रुद्रनाथ मंदिर के निकट स्थित हैं।

   पनार बुगियल : पनार बुगियल वस्तुत: रुद्रनाथ का प्राकृतिक सुन्दर घास का मैदान है। बुगियल सुगंधित फूलों का एक सुन्दर खजाना है। फूलों की यहां असंख्य प्रजातियां देखने को मिलती हैं। इस इलाके में सुन्दर झरना एवं ट्रैकिंग एरिया भी है। 
   जोशीमठ: जोशीमठ वस्तुत: चमोली का एक प्राकृतिक सुन्दरता से आच्छादित शहर है। समुद्र तल से करीब 6000 फुट की ऊंचाई पर स्थित जोशीमठ चौतरफा हिम श्रंखला से घिरा सुन्दर शहर है। जोशीमठ की श्रेष्ठतम तीर्थ के तौर पर मान्यता है।
   खास यह कि यहां मंदिरों की एक सुन्दर श्रंखला है। जोशीमठ की स्थापना आदि शंकराचार्य ने 8 वीं शताब्दी में की थी। मान्यता है कि देश के शीर्ष चार मठों में जोशीमठ एक है। इस शहर को पूर्व काल में कार्तिकेयपुरा के नाम से जाना पहचाना जाता था। 

   कल्पवृक्ष: कल्पवृक्ष वस्तुत: एक प्राचीन वृक्ष है। जोशीमठ के निकट स्थित कल्पवृक्ष की विशिष्टताओं की एक लम्बी श्रंखला है। मान्यता है कि इसी कल्पवृक्ष के नीचे बैठ कर आदि शंकराचार्य ने घोर तप किया था। मान्यता है कि कल्पवृक्ष करीब 1200 पुराना है। कल्पवृक्ष की परिधि करीब 21.5 मीटर है।

   नरसिंह मंदिर: नरसिंह मंदिर रुद्रनाथ एवं जोशीमठ का अति प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में भगवान नरसिंह की प्रतिमा स्थापित है। बताते हैं कि भगवान नरसिंह की प्रतिमा नित्य प्रतिदिन सिकुड़ती जा रही है। मान्यता है कि जिस दिन प्रतिमा का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा, उस दिन भूस्खलन आदि घटनाएं होंगी।
   रुद्रनाथ हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट देहरादून है। रुद्रनाथ हिल स्टेशन से जॉली ग्रांट एयरपोर्र्ट देहरादून की दूरी करीब 258 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से रुद्रनाथ हिल स्टेशन की दूरी करीब 241 किलोमीटर है। पर्यटक या तीर्थयात्री सड़क मार्ग से भी रुद्रनाथ हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
30.744230,79.492439

फागू हिल स्टेशन: रोमांचक एहसास    फागू हिल स्टेशन निश्चय ही दिल एवं दिमाग को एक सुखद शांति एवं शीतलता प्रदान करेगा। फागू हिल स्टेशन आकार...