Friday, 15 March 2019

बीर हिल स्टेशन: साहसिक खेलों का स्वर्ग

   बीर हिल स्टेशन को रोमांचक खेलों का स्वर्ग कहा जाना चाहिए। जी हां, बीर हिल स्टेशन रोमांचक खेलों मसलन पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग एवं ध्यान के लिए खास तौर से ख्याति रखता है। 

  भारत के हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा का यह एक छोटा शहर है। समुद्र तल से करीब 1525 मीटर ऊंचाई पर स्थित बीर हिल स्टेशन सौन्दर्य शास्त्र का अद्भुत आयाम कहना चाहिए।
  वस्तुत: बीर को बीर-बिलिंग के नाम से जाना पहचाना जाता है। जोगिन्दर घाटी के इस सुन्दर गांव को खास तौर से पैराग्लाइडिंग के लिए बेहद पसंद किया जाता है। 

  रोमांचक खेलों के साथ ही बीर हिल स्टेशन को अध्ययन एवं ध्यान के लिए भी जाना पहचाना जाता है।
   बीर हिल स्टेशन में बौद्ध मठ एवं बड़े स्तूप की एक लम्बी श्रंखला है। स्तूप के साथ ही तिब्बती शरणार्थी बस्ती भी है। इस बस्ती में तिब्बती संस्कृति की विहंगमता दर्शनीय है।

  इसे बीर तिब्बती कालोनी या शरणार्थी बस्ती कहा जाता है। कांगड़ा जिला का बीर-बिलिंग एक अति सुन्दर हिल स्टेशन है। 
  चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। चौतरफा मखमली घास के मैदान एवं ढ़लान एक सुखद स्पर्श का एहसास कराते हैं। 

   घाटियों-वादियों एवं हिम शिखरों से आच्छादित इस इलाके में एक सुखद शांति के साथ शीतलता का एहसास पर्यटक करते हैं।
  बारिश में चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की एक निराली आभा प्रस्फुटित होेती है। वनस्पतियों से आच्छादित वन क्षेत्र बीर हिल स्टेशन को एक  विशेष सुगंध से परिपूरित रखते हैं। 

  वनस्पतियों की सुगंध पर्यटकों को एक विशेष ताजगी का एहसास कराती है। जिससे पर्यटक बीर हिल स्टेशन की ओर खिंचे चले आते हैं।
  बर्फबारी का बीर हिल स्टेशन पर आनन्द ही कुछ आैर होता है। हिम शिखर से लेकर-घर-घरौंदे सभी कुछ बर्फ की सुनहरी चादर में लिपटे नजर आते हैं। 

   धर्मशाला से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित बीर हिल स्टेशन प्राकृतिक सौन्दर्य का विलक्षण आयाम है।
  थासर दर्रा के निकट स्थित बीर-बिलिंग धौलाधर पर्वत श्रेणी का एक शानदार हिस्सा है। पैराग्लाइडिंग की रोमांचक यात्रा पर्यटकों के लिए एक शानदार अनुभव होता है।

  प्रतिस्पर्धा के दौरान तो जैसे आकाश पैराग्लाइडिंग के शौकीन पर्यटकों से भर जाता है। शायद इसीलिए बीर हिल स्टेशन वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा बन गया है। कारण यहां रोमांच का एक शानदार अनुभव मिलता है।

  खास यह पैराग्लाइडिंग साइट  समुद्र तल से करीब 2400 मीटर ऊंचाई पर स्थित हैं। पैराग्लाइडिंग के इस इलाके को चौगान के नाम से जाना पहचाना जाता है। यहां से बीर हिल स्टेशन एवं आसपास का अद्भुत दृश्य दिखता है।
   यह दृश्य बेहद रोमांचक होता है। यहां पैराग्लाइडिंग की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं। पैराग्लाइडिंग का मौसम खास तौर से सितम्बर से अक्टूबर की अवधि होती है।

  खास यह कि पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताओं की मेजबानी गांव के बाशिंदे ही करते हैं। चौगान गांव के पश्चिम इलाका में स्थित बीर तिब्बती कालोनी का अपना एक अलग ही अंदाज दिखता है। तिब्बती कालोनी करीब 60 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। 

   तिब्बती कालोनी में तिब्बती हस्तकला केन्द्र, तिब्बती चिकित्सा एवं ज्योतिष संस्थान, हिरण उद्यान एवं आध्यात्मिक अध्ययन एवं साधना केन्द्र आदि इत्यादि बहुत कुछ है। बीर हिल स्टेशन के निकट ही शेरब लिंग मठ स्थित है।

  मठ में तिब्बती संस्कृति एवं साधना के दर्शन होते हैं। यहां कई होम स्टे साइट भी हैं। इन स्थानों पर पर्यटक विश्राम कर बीर हिल स्टेशन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। 
  बीर हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य हॉलीवुड एवं बॉलीवुड को भी आकर्षित करता है। इस इलाके में कई फिल्मों को शूट किया जा चुका है।

   बीर हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गग्गल एयरपोर्ट कांगड़ा है। निकटतम रेलवे स्टेशन पठानकोट जंक्शन है। 
  पठानकोट जंक्शन से बीर हिल स्टेशन की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी बीर हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
32.101500,76.273200

Tuesday, 12 March 2019

दीदीहाट हिल स्टेशन: अतुलनीय सौन्दर्य

   दीदीहाट हिल स्टेशन को प्रकृति का ह्मदय कहा जाना चाहिए। जी हां, दीदीहाट हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य अतुलनीय है।

   मनोरम घाटियों-वादियों, आैषधीय वनस्पतियों एवं वन्य जीवन से आलोकित दीदीहाट हिल स्टेशन अद्भुत है।
   भारत के प्रांत उत्तराखण्ड के जिला पिथौरागढ़ का यह हिल स्टेशन वैश्विक पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

   समुद्र तल से करीब 1725 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दीदीहाट हिल स्टेशन आैषधीय वनस्पतियों का खजाना है। चौतरफा मखमली घास के शानदार एवं सुन्दर मैदान एवं ढ़लान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

  खास यह कि दीदीहाट हिल स्टेशन कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक सुन्दर पड़ाव है। दीदीहाट हिल स्टेशन के चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की इन्द्रधनुषी छटा दिखती है। 
   पंचाचूली चोटियों से घिरा दीदीहाट हिल स्टेशन बेहद मनोरम है। बर्फ से आच्छादित पर्वत चोटियां आकर्षण का केन्द्र रहती हैं। 

   खास यह कि हिमालय का मनोहारी दृश्य यहां से दिखता है। दीदीहाट का शाब्दिक अर्थ छोटी पहाड़ी से है।
   दीदीहाट के नीचे स्थित घाटी को हाट घाटी कहा जाता है। दीदीहाट हिल स्टेशन एवं उसके आसपास का इलाका बेहद उपजाऊ है।

  लिहाजा चौतरफा एक सुन्दर परिदृश्य दिखता है। उत्तराखण्ड के कुमाऊं मण्डल का यह शानदार हिल स्टेशन प्राकृतिक विशिष्टता के लिए जाना पहचाना जाता है। दीदीहाट हिल स्टेशन के पश्चिम में डिगताड़ के निकट एक पर्वत चोटी पर सिराकोट किला है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो सिराकोट सीरा के मल्ल राजाओं की राजधानी हुआ करता था। राजा हरि मल्ल के शासनकाल में यह क्षेत्र नेपाल के डोटी साम्राज्य के अधीन होता था। दीदीहाट हिल स्टेशन से सिराकोट की दूरी करीब दो किलोमीटर है। 

  सिराकोट किला के साथ ही मंदिरों की शानदार श्रंखला पर्यटक देख सकते हैं। इस किला के बाहरी हिस्से में राजसी आवास था। खास यह कि किला के आंतरिक क्षेत्र में शिव एवं भैरव मंदिर हैं।
  इन मंदिरों की प्राचीनता अभी भी दर्शनीय है। खास यह कि पंचचूली हिमालय श्रंखला का मनोहारी दृश्य यहां से दिखता है। विशेषज्ञों की मानें तो दीदीहाट हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका देव आशीर्वाद से आलोकित रहता है। 
   प्राचीनकाल से अब तक असंख्य साधु-संतों की तप स्थली रहा दीदीहाट हिल स्टेशन को तपोभूमि भी कहा जा सकता है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो दीदीहाट में पाण्डव बंधुओं ने अपने अज्ञातवास का एक लम्बा समय यहां व्यतीत किया था।
  स्वर्गारोहण यात्रा से पहले पाण्डव बंधुओं ने पंचचूली हिमालय की पर्वत भूमि पर चुल्हा जलाया था। इसी स्थान को पंचचूली कहा जाता है। 

   खास यह कि दीदीहाट की लोक संस्कृति, कुमाऊंनी संस्कृति एवं तिब्बती संस्कृति का समिश्रित स्वरूप दीदीहाट हिल स्टेशन पर दिखता है। 
  खास यह कि दीदीहाट हिल स्टेशन एक मिश्रित संस्कृति का क्षेत्र है। यहां की विशिष्ट सांस्कृतिक परम्परा की शानदार झलक नृत्य एवं गीतों में देखने को मिलती है। 

   दीदीहाट हिल स्टेशन पर लोक उत्सव अति दर्शनीय होते हैं। दीदीहाट के सामूहिक नृत्य को चांचरी कहते हैं। इसमें नृत्य एवं गान का समिश्रण होता है।
  विवाह एवं मेलों में यहां की सांस्कृतिक परम्परा विशेष तौर से दिखती है। इसे छोलिया नृत्य कहते हैं। वस्तुत: यह युद्ध कला का प्रदर्शन होता है। 

   खास तौर से इसमें पुरुष नृत्य करते समय एक हाथ में ढ़ाल एवं एक हाथ में तलवार लेकर भाव भंगिमाओं का प्रदर्शन करता है। आक्रमण एवं बचाव की मुद्राएं दर्शनीय होती हैं।
   दीदीहाट हिल स्टेशन की रमणीकता बेहद आकर्षक है। चौतरफा वनस्पतियों की खास सुगंध दिल एवं दिमाग को विशेष ताजगी प्रदान करती हैं।
   सर्दियों में बर्फ से ढ़के पहाड़ एवं आशियाने बेहद सुन्दर प्रतीत होते है। बादलों की अठखेलियां दिलों की लुभाती हैं।

   दीदीहाट हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गोविन्द बल्लभ पंत एयरपोर्ट पंतनगर है।
   पंतनगर एयरपोर्ट से दीदीहाट हिल स्टेशन की दूरी करीब 229 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम एवं टनकपुर है।
   काठगोदाम जंक्शन से दीदीहाट हिल स्टेशन की दूरी करीब 195 किलोमीटर है। पर्यटक दीदीहाट हिल स्टेशन की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
29.773100,80.286200

Sunday, 10 March 2019

पंचगनी हिल स्टेशन: अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य

   पंचगनी हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य किसी जादू से कम नहीं। जी हां, पंचगनी हिल स्टेशन के प्राकृतिक सौन्दर्य को अद्भुत भी कह सकते हैं। 

   खास यह कि पंचगनी हिल स्टेशन पर चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा दर्शनीय है। भारत के महाराष्ट्र का यह सुन्दर हिल स्टेशन वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। 
 महाराष्ट्र के सतारा जिला का यह हिल स्टेशन पांच पर्वत श्रंखलाओं से घिरा है।

   शायद इसीलिए इसे पंचगनी हिल्स के नाम से जाना पहचाना जाता है। झीलों-झरनों एवं नदियों का मुख्य आकर्षण रखने वाला पंचगनी हिल स्टेशन चौतरफा एक मखमली एहसास कराता है। पंचगनी हिल स्टेशन की खोज ब्रिाटिश शासनकाल में की गयी थी।

  ब्रिटिश हुकूमत ने गर्मियों से बचने के लिए पंचगनी हिल स्टेशन की खोज की थी। खास यह कि 1860 के दशक में इसे ब्रिटिश अफसर जॉन चेस्सों ने खोजा था। इस ब्रिाटिश अफसर ने पश्चिमी दुनिया की विशिष्ट वनस्पतियों के पौधे यहां रोपित किये थे। 

  जिसमें अब सिल्वर ओक एवं पोर्इंसेत्टिया सहित असंख्य प्रजातियों की वनस्पतियों को यहां संरक्षण मिलता है। पंचगनी हिल स्टेशन का मौसम सदैव खुशगवार रहता है। 
  ब्रिटिश हुकूमत ने इसे आरामगाह के तौर पर विकसित किया था। सहयाद्री पर्वत श्रंखला के आगोश में स्थित पंचगनी हिल स्टेशन एक विशेष आकर्षण रखता है। 

   पंचगनी हिल स्टेशन के मध्य प्रवाहित कृष्णा नदी यहां का मुख्य आकर्षण है। खास यह कि यहां प्राचीन सौन्दर्य भी दिखता है। लिहाजा पर्यटक ग्रामीण संस्कृति का भरपूर आनन्द लेते हैं।
  पंचगनी हिल स्टेशन की गोद में रचे-बसे गांव की अपनी एक अलग ही आभा रहती है। दंदेघर, खिंगर, गोद्वाली, अमरल एवं तैघाट आदि गांव यहां की खास शोभा हैं। 

  समुद्र तल से करीब 1350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पंचगनी हिल स्टेशन बेहद शांत एवं शीतल रहता है।
  बारिश के मौसम में यहां का सौन्दर्य कुछ अधिक खिल उठता है। खास यह कि प्रकृति के बीच कुछ अलग ही जादू सा प्रतीत होता है। 

  पंचगनी हिल स्टेशन के पहाड़, जादुई झरने, सुन्दर झीलें आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीय हैं। यहां की निराली पहाड़ियां बेहद आकर्षक हैं।
  पंचगनी हिल स्टेशन पर सूर्योदय एवं सूर्यास्त का अप्रतिम सौन्दर्य अति दर्शनीय होता है। जल क्षेत्र में जलक्रीड़ा करना या नौकायन का आनन्द पर्यटकों को एक विशेष रोमांच का एहसास कराता है। 

   पैराग्लाइडिंग का शौक रखने वाले पर्यटकों के लिए तो पंचगनी हिल स्टेशन किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पंचगनी हिल स्टेशन की घाटियां-वादियां एवं वनस्पतियों से आच्छादित वन क्षेत्र पर्यटकों को भरपूर आक्सीजन प्रदान करते हैं। 
  पर्यटक यहां उड़ान का रोमांचक अनुभव करते हैं। प्रकृति प्रेमियों को पंचगनी हिल स्टेशन पर एक अद्भुत दुनिया दिखती है। 

   खास यह कि पंचगनी हिल स्टेशन का पारसी प्वाइंट एवं सिडनी प्वाइंट विशेष आकर्षण है। कृष्णा नदी की रमणीयता देखते ही बनती है।
   भिलार वॉटर फॉल्स की सुन्दरता देखते ही बनती है। इसे एक आदर्श पिकनिक स्पॉट कहा जा सकता है। पर्यटक पंचगनी हिल स्टेशन रोमांचक एवं साहसिक खेलों का शौक भी पूरा कर सकते हैं। 

   मसलन घुड़सवारी एवं पैराग्लाइडिंग आदि इत्यादि का पर्यटक भरपूर आनन्द उठा सकते हैं। शेरबाग यहां का एक मुख्य आकर्षण है। 
  वस्तुत: यह बच्चों का एक सुन्दर एवं शानदार पार्क है। इस अद्भुत पार्क में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां, खरगोश, बतख एवं हंस आदि असंख्य जीव जन्तु हैं। 

  खास यह कि पंचगनी हिल स्टेशन पर प्राचीन इमारतों एवं स्मारकों का एक अलग एवं विशेष आकर्षण है। ब्रिटिशकाल का विलक्षण वास्तुशिल्प अति दर्शनीय है।
   पंचगनी हिल स्टेशन की शुद्ध जलवायु फेफड़ों को आक्सीजन से भर देती है। पंचगनी हिल स्टेशन की शुद्ध एवं ताजगी युक्त हवाएं पर्यटकों को एक विशेष ऊर्जा प्रदान करती हैं। मानों जैसे फेफड़ों को पंख लग जायें। 

  स्वास्थ्य की दृष्टि से पंचगनी हिल स्टेशन का सैर सपाटा पर्यटकों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं। पंचगनी हिल स्टेशन के विशेष आकर्षण में कमलगढ़ का किला, सिडनी प्वाइंट, प्रतापगढ़ का किला, वेन्ना झील, टेबल लैंड, भगवान कार्तिकेय का मंदिर, कनॉट पीक, लोंडविक प्वाइंट आदि इत्यादि हैं।
   पंचगनी हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट लोहेगांव एयरपोर्ट पुणे है। निकटतम रेलवे स्टेशन सतारा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पंचगनी हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
17.924400,73.799500

Tuesday, 5 March 2019

कसोल हिल स्टेशन: प्रकृति का नायाब तोहफा

   कसोल हिल स्टेशन को प्रकृति का नायाब तोहफा कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, कसोल हिल स्टेशन के चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा दिखती है। 

  भारत के हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू का यह शानदार हिल स्टेशन देश-विदेश के पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। कसोल हिल स्टेशन वस्तुत: हिमाचल प्रदेश का एक छोटा सा गांव है। 

   समुद्र तल से करीब 1580 मीटर ऊंचाई पर स्थित कसोल हिल स्टेशन ट्रैकर्स, बैकपैकर एवं प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग की भांति है। प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज कसोल हिल स्टेशन भारत के एम्स्टर्डम के रूप में जाना पहचाना जाता है।

  पार्वती नदी के किनारे स्थित कसोल हिल स्टेशन प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत आयाम है। भंुतर एवं मणिकरण के मध्य रचा-बसा यह हिल स्टेशन चौतरफा मखमली घास से आच्छादित है।
   प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण इसे भारत का मिनी इजराइल भी कहा जाता है। आैषधीय वनस्पतियों, देवदार के सघन वन क्षेत्र कसोल हिल स्टेशन की शान हैं।

  शांत एवं शीतल वातावरण पर्यटकों को एक विशेष सुकून प्रदान करते हैं। खास यह कि कसोल का मौसम हमेशा खुशगवार रहता है। 
   कसोल हिल स्टेशन पर बर्फबारी का आनन्द लेना हो तो पर्यटकों को दिसम्बर से फरवरी के मध्य यात्रा करनी चाहिए। चौतरफा बर्फ की सुन्दर चादर दिखेगी। 

   बर्फबारी का सुन्दर दृश्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। हरे-भरे मखमली घास के मैदान हों या फिर शानदार आशियाने हों, सभी बर्फ की चादर से ढ़के नजर आते हैं।
   बर्फ से खेलना एक शानदार रोमांचक अनुभव कराता है। कुल्लू से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित कसोल हिल स्टेशन एक अद्भुत एवं विलक्षण प्रतीत होता है। 

  खास यह कि कसोल संगीत समारोह के लिए देश दुनिया में प्रसिद्ध है। कसोल संगीत समारोह प्रति वर्ष नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित होता है। दुनिया भर के पर्यटक इस आनन्द की अनुभूति के लिए यहां एकत्र होते हैं।

  खास यह कि पर्यटक कसोल हिल स्टेशन पर गांव की मेहमानवाजी का भरपूर आनन्द उठा सकते है। इसके लिए पर्यटकों को शुल्क चुकाना पड़ता है। 
  कुल्लू का यह गांव पर्यटकों के बीच अपने खास प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटक यहां प्रकृति की गोद एवं तारों की छांव का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। इसे भारत का मिनी स्वीट्जरलैंड भी कहा जाता है। 

   पर्यटक कसोल हिल स्टेशन एवं आसपास प्राकृतिक सौन्दर्य का भरपूर लुफ्त ले सकते हैं। पार्वती नदी, खीरगंगा चोटी, मलाना, तोष, मणिकरण, जरी एवं भुंतर आदि इत्यादि की सैर कर आनन्द ले सकते हैं।
  देवदार एवं आैषधीय वनस्पतियों का सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को विशेष आनन्द की अनुभूति कराता है। 

  पार्वती नदी का निर्मल जल पर्यटकों को जलक्रीड़ा के लिए आमंत्रित करता है। नदी के जल के साथ अठखेलियां करना बेहद रोमांचक होता है।
  घाटियों-वादियों से लेकर पर्वत मालाओं से आच्छादित यह हिल स्टेशन बेहद लुभावना है। पर्यटक यहां का सुहावने मौसम में खो से जाते हैं।

  कसोल हिल स्टेशन की यात्रा के लिए सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से जून की अवधि है। खास यह कि कसोल हिल स्टेशन फूलों की विभिन्न प्रजातियों से शोभायमान है। लिहाजा फूलों की सुगंध दिल एवं दिमाग को एक विशेष ताजगी प्रदान करती है। 

  पर्यटक कसोल हिल स्टेशन पर भरपूूर आक्सीजन का एहसास करते हैं। खास यह कि इस परिवेश में फेफड़ों को जैसे पंख लग जाते हों।
   पर्यटक कसोल हिल स्टेशन की यात्रा कर खुद को अति ऊर्जावान होने का एहसास करते हैं।

  कसोल हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भुंतर एयरपोर्ट है। भुंतर एयरपोर्ट से कसोल हिल स्टेशन की दूरी करीब 40 किलोमीटर है।
   निकटतम रेलवे स्टेशन कालका जंक्शन एवं चण्डीगढ़ जंक्शन है। कालका जंक्शन से कसोल हिल स्टेशन की दूरी करीब 135 किलोमीटर है। चण्डीगढ़ जंक्शन से कसोल हिल स्टेशन की दूरी करीब 152 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कसोल हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
31.912800,77.174300

Sunday, 3 March 2019

गंगोलीहाट हिल स्टेशन: प्राकृतिक सौन्दर्य

  गंगोलीहाट हिल स्टेशन के प्राकृतिक सौन्दर्य को अद्भुत कहा जाना चाहिए। जी हां, हिमालय की गोद में रचा-बसा यह सुन्दर स्थान बेहद विलक्षण है।

  भारत का देवलोक कहे जाने वाले प्रांत उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिला का यह सुन्दर हिल स्टेशन पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। गंगोलीहाट हिल स्टेशन वस्तुत: हाट कालिका मंदिर के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है।

  हाट कालिका मंदिर को सिद्धपीठ की मान्यता है। इस सिद्धपीठ की स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी। हाट कालिका देवी को रणभूमि के जवानों की रक्षक माना जाता है। 
  आस्था एवं विश्वास का यह केन्द्र चौतरफा देवदार के शानदार एवं सुन्दर वृक्षों से घिरा है। यूं कहें कि हाट कालिका मंदिर देवदार के सघन वन क्षेत्र में स्थित है, तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।

  विशेषज्ञों की मानें तो प्राचीन ग्रंथोंं में हाट कालिका मंदिर का उल्लेख है। मान्यता है कि पश्चिम बंगाल से काली जी यहां स्थानान्तरित हो गयी थीं।
  काली जी का यह स्थान उनका घर माना जाता है। काली देवी का यह स्थान एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। 

   शक्तिपीठ की मान्यता के अनुसार हाट कालिका मंदिर में पवित्र अग्नि प्रज्जवलित है। मान्यता है कि इस मंदिर को दिव्य-भव्य स्वरूप स्वयं देवी ने दर्शन देकर कराया है। किवदंती है कि संत जंगम बाबा के स्वप्न में मां काली ने दर्शन दिये।

  मां काली ने इस स्थान पर भव्य-दिव्य मंदिर बनाने की इच्छा व्यक्त की लिहाजा इस स्थान पर काली जी का भव्य-दिव्य मंदिर बना।
  श्रद्धालु जंगम बाबा के प्रति भी अगाध श्रद्धा रखते हैं। समुद्र तल से करीब 1347 मीटर ऊंचाई पर स्थित गंगोलीहाट हिल स्टेशन बेहद शांत एवं सुरम्य स्थान है।

  सुगंधित फूलों की असंख्य प्रजातियां गंगोलीहाट हिल स्टेशन को बेहद खुशनुमा बना देती हैं। खास यह कि पर्यटक गंगोलीहाट हिल स्टेशन पर भरपूर आक्सीजन एवं ताजगी का सुखद एहसास करते हैं। गंगोलीहाट हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित है।

  लिहाजा पर्यटक यहां प्राण वायु का बोध करते हैं। मानों यहां फेफड़ों को पंख लग जाते हैं। चौतरफा वनस्पतियों की खास सुगंध पर्यटकों को एक विशेष ऊर्जा प्रदान करती है।
  पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से करीब 77 किलोमीटर दूर स्थित गंगोलीहाट हिल स्टेशन एक अलग ही दुनिया होने का एहसास कराता है। 

  सरयू नदी एवं रामगंगा नदी के मध्य स्थित गंगोलीहाट हिल स्टेशन को एक आदर्श पर्यटन क्षेत्र माना जाता है। प्राचीनकाल में इसे गंगावली कहा जाता था। 
  शनै-शनै इसको गंगोली कहा जाने लगा। विशेेषज्ञों की मानें तो तेरहवीं शताब्दी में इस क्षेत्र में कत्यूरी राजवंश का शासन था।

  गंगोली का व्यावसायिक केन्द्र गंगोलीहाट रहा। तेरहवीं शताब्दी के बाद इस इलाके में मनकोटी राजाओं का शासनकाल था। इस शासनकाल की राजधानी मनकोट में रही। 

   खास यह प्राकृतिक सौन्दर्य की आभा से आलोकित गंगोलीहाट हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका बेहद दर्शनीय एवं आकर्षक है। चौतरफा मखमली घास से लदे मैदान एवं ढ़लान पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं।

  गंगोलीहाट हिल स्टेशन की शांत एवं शीतल हवा के झोके मन एवं तन को तरोताजा कर देते हैं। बादलों की अठखेलियां दिलों को छू जाती हैं।
  खास यह कि पर्यटक बादलोें की इन अठखेलियों के मध्य बेहद रोमांच का एहसास करते हैं। बादल कभी पर्यटकों की गोद में होते हैं तो कभी पर्यटक बादलों की गोद में होते हैं।
  पर्वतीय सौन्दर्य की गंगोलीहाट हिल स्टेशन पर एक निराली छटा दिखती है। पर्यटक यहां खुद को पर्वतों की गोद में होने का एहसास करते हैं।

  गंगोलीहाट हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून है। निकटतम रेलवे स्टेशन टनकपुर एवं काठगोदाम जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी गंगोलीहाट हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
29.657290,80.039980

फागू हिल स्टेशन: रोमांचक एहसास    फागू हिल स्टेशन निश्चय ही दिल एवं दिमाग को एक सुखद शांति एवं शीतलता प्रदान करेगा। फागू हिल स्टेशन आकार...