Monday, 23 September 2019

मणिपुर हिल स्टेशन: सुन्दरता का खजाना

   मणिपुर हिल स्टेशन को सुन्दरता का खजाना कहा जाना चाहिए। जी हां, मणिपुर हिल स्टेशन की हरी भरी वादियां-घाटियां, पर्वत मालाओं की श्रंृखला, आैषधीय वनस्पतियों की भीनी-भीनी सुगंध पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। 

   भारत के उत्तरी-पूर्वी इलाके का मणिपुर हिल स्टेशन वस्तुत: प्रकृति का एक सुन्दर आयाम है। खास यह कि मणिपुर का प्राकृतिक सौन्दर्य खुद ब खुद पर्यटकों को आकर्षित करता है। मणिपुर की शीतल जलवायु मन मस्तिष्क को एक खास उत्साह एवं उर्जा प्रदान करती है। 

  सर्दियों में मणिपुर हिल स्टेशन की यात्रा का आनन्द दोगुना हो जाता है। कारण तापमान कई बार सर्दियों में शून्य से भी नीचे चला जाता है। बारिश का भरपूर आनन्द लेेना हो तो पर्यटकों को मई से अक्टूबर की अवधि में मणिपुर हिल स्टेशन की यात्रा करनी चाहिए। 

   इस अवधि में मणिपुर हिल स्टेशन पर बारिश का मौसम होता है। खास यह कि मणिपुर वस्तुत: लोक नृत्य की विविधिता की ख्याति रखता है। मणिपुर नृत्य देख कर पर्यटक मुग्ध हो जाते हैं। मणिपुर हिल स्टेशन पर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पर्यटक प्रकृति की गोद में हों। 

   मणिपुर हिल स्टेशन पर बादलों का खिलंदडपन पर्यटकों को बेहद रोमांचित करता है। बादलों के साथ खेलना पर्यटकों को जीवन पर्यंत न भूलने वाला रोमांचक अनुभव देता है। बारिश के मौसम में पर्यटक भीगना नहीं भूलते। कारण मणिपुर हिल स्टेशन की बारिश का मजा ही कुछ आैर होता है। 

   इतना ही नहीं, मणिपुर हिल स्टेशन चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा रखता है। काइना हिल्स, लांंगथबल हिल्स, मैबम लोकपा हिल्स, खोरीपाबा हिल्स, कांगचुप हिल्स, पर्वत किशा हिल्स आदि इत्यादि मणिपुर हिल स्टेशन की शान एवं शोभा हैं।  
   काइना हिल्स: काइना हिल्स मणिपुर की राजधानी इम्फाल से करीब 29 किलोमीटर दूर एक शानदार हिल्स एरिया है। काइना हिल्स का निराला प्राकृतिक सौन्दर्य एक सम्मोहन रखता है। इस प्राकृतिक सौन्दर्य से पर्यटक सम्मोहित हुये बिना नहीं रह सकते।

   समुद्र तल से करीब 921 मीटर ऊंचाई पर स्थित काइना हिल्स एक शानदार आध्यात्मिक केन्द्र एवं हिन्दुओं का तीर्थ भी है। यह पर्वतीय क्षेत्र हरे भरे पहाड़ों एवं शांत-शीतल परिवेश के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है।
   लांगथबल हिल्स: लांगथबल हिल्स मणिपुर हिल स्टेशन का एक आैर शानदार सौन्दर्य है। इण्डो-बर्मा रोड़ पर मणिपुर हिल स्टेशन से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित यह पहाड़ी स्टेशन अद्भुत एवं विलक्षण है। लांगथबल हिल्स वस्तुत: ऐतिहासिक महत्व के प्राचीन खण्डहरों के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। लांगथबल सुनियोजित मंदिरों, कटहल के पेड़ों, देवदार के वृक्षों एवं पारम्परिक घरों के लिए प्रसिद्ध है। 

   मैबम लोकपा हिल्स: मैबम लोकपा हिल्स वस्तुत: मणिपुर हिल स्टेशन का एक शानदार हिल्स एरिया है। स्थानीय स्तर पर इसे लाल पहाड़ी के तौर पर जाना पहचाना जाता है। मणिपुर की राजधानी इम्फाल से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित यह एक आदर्श एवं सुन्दर पिकनिक स्पॉट भी है। 
   खोरीपाबा हिल्स: खोरीपाबा हिल्स अपने खास प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जाना पहचाना जाता है। लाई हरोबा खोरीपाबा का विशेष त्योहार है। इस दौरान पर्यटकों का उत्साह देखते ही बनता है। 
   कांगचुप पहाड़ी: कांगचुप पहाड़ी मणिपुर हिल स्टेशन का एक मुख्य आकर्षण है। कांगचुप से इम्फाल घाटी का सुन्दर नजारा दिखता है। कांगचुप हिल्स नम्बोल नदी के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। 
  पर्वत किशा: पर्वत किशा एक खास एवं पवित्र स्थान है। यहां एक गुफा है। इस गुफा को अति पवित्र माना जाता है। गुफा के जल को विशेष माना जाता है। मान्यता है कि यह जल स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
   मणिपुर हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बीर टिकेन्द्रजीत इण्टरनेशनल एयरपोर्ट इम्फाल है। निकटतम रेलवे स्टेशन दीमापुर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मणिपुर हिल स्टेशन की यात्रा कर सकतेे हैं।
24.649936,93.810293

Monday, 16 September 2019

गंगामूला हिल स्टेशन : सुगंध का खजाना

   गंगामूला हिल स्टेशन को आैषधीय वनस्पतियों का खजाना कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। इन आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से गंगामूला हिल स्टेशन हमेशा महकता रहता है।

   जिससे मन एवं मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठता है। भारत के कर्नाटक राज्य के चिकमंगलुरु जिला का यह शांत एवं सुरम्य हिल स्टेशन दक्षिण भारत का स्वर्ग कहा जाता है। समुद्र तल से करीब 1458 मीटर ऊंचाई पर स्थित गंगामूला हिल स्टेशन फोटोग्राफी के लिए एक आदर्श हिल स्टेशन है।

  सघन वन क्षेत्र से आच्छादित यह हिल स्टेशन वस्तुत: कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा है। धुंधली जलवायु वाला गंगामूला हिल स्टेशन अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए वैश्विक ख्याति रखता है। गंगामूला हिल स्टेशन इलाके की मुख्य नदियों का उद्गम स्थल भी है।

   गंगामूला से तुंगा नदी, भद्रा नदी एवं नेत्रवती नदी का उद्गम होता है। गंगामूला की यह नदियां इस शानदार एवं सुन्दर हिल स्टेशन की शान एवं शोभा हैं। खास यह कि गंगामूला हिल स्टेशन को दक्षिण भारत का आदर्श हिल स्टेशन माना जाता है। इस इलाके को वाराह पर्वत के रूप में भी जाना पहचाना जाता है। 

   पश्चिमी घाट के इस इलाके को खास तौर से वर्षा क्षेत्र भी माना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो गंगामूला हिल स्टेशन खनिज सम्पदाओं का अति समृद्धशाली क्षेत्र है। वर्षा वन की प्रमुखता वाले इस क्षेत्र को खास धरोहर के तौर पर देखा जाता है। 

   प्राकृतिक सौन्दर्य एवं विशिष्टताओं के कारण गंगामूला हिल स्टेशन को यूनेस्को ने वैश्विक धरोहर घोषित किया है। इसे जैव विविधिता का एक विशेष क्लस्टर कहा जा सकता है।
  गंगामूला हिल स्टेशन वस्तुत: पश्चिमी घाटों की सुन्दर एवं लुभावनी पहाड़ियां हैं। इलाके की तीनों शक्तिशाली नदियां इन पहाड़ियों से प्रवाहित होती हैं। 

   गंगामूला हिल स्टेशन के सघन वन क्षेत्र में देवी भगवती को समर्पित एक दिव्य-भव्य मंदिर है। इस मंदिर की स्थापत्य कला अति सुन्दर है। पहाड़ियों में गुफा के आंतरिक क्षेत्र में वाराह की 1.8 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित है। इस पर्वत को वाराह पर्वत के नाम से जाना पहचाना जाता है। 

   यह सघन वन क्षेत्र जंगली जीवन से अति समृद्ध है। पशु-पक्षियों के लिए यह इलाका किसी स्वर्ग से कम नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो गंगामूला हिल स्टेशन के इस इलाके में पक्षियों की 110 से अधिक प्रजातियां संरक्षित एवं पल्लवित हैं।

   गंगामूला हिल स्टेशन पर्यटकों को यात्रा का एक सुखद एहसास कराता है। शुद्ध जलवायु पर्यटकों को भरपूर आक्सीजन देती है। पर्यटकों को एहसास होता है कि फेफड़ों को जैसे पंख लग गये हों। शुद्ध जलवायु पर्यटकों को एक खास उत्साह से भर देती है। 

   गंगामूला हिल स्टेशन पर झील एवं झरनों की लम्बी श्रंृखला इसे काफी कुछ खास बना देती है। झील एवं झरनों की शोभा गंगामूला हिल स्टेशन की सुन्दरता में चार चांद लगा देती है। 

   यह परिदृश्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। शांत, सुरम्य एवं शीतलता वाला गंगामूला हिल स्टेशन देेश विदेश के पर्यटकों को एक खास आकर्षण प्रदान करता है। 

   मखमली घास के मैदान, पर्वत की घाटियां-वादियां एवं लहराती-बलखाती सड़कों की श्रंखला गंगामूला हिल स्टेशन का आकर्षण आैर भी अधिक बढ़ा देती हैं। आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध पर्यटकों को एक उत्साह से भर देती है। जिससे पर्यटक एक विशेष ताजगी का एहसास करते हैं।

    गंगामूला हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट मंगलुरु एयरपोर्ट है। मंगलुरु एयरपोर्ट से गंगामूला हिल स्टेशन की दूरी करीब 113 किलोमीटर है। 
  निकटतम रेलवे स्टेशन कादूर जंक्शन है। कादूर जंक्शन रेलवे स्टेशन से गंगामूला हिल स्टेशन की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी गंगामूला हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
12.864840,74.843080

Sunday, 15 September 2019

नंदी हिल्स : बादलों का रोमांच

   नंदी हिल्स का अनुपम सौन्दर्य निश्चय ही आपको मुग्ध कर लेगा। नंदी हिल्स पर प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत एवं विलक्षण दर्शन इसे काफी कुछ खास बना देता है। इसे बादलों का सुन्दर आशियाना भी कह सकते हैं। 

   नंदी हिल्स पर बादलों संग अठखेेलियां करना बेहद रोमांचक एहसास होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे बादल पर्यटकों की गोद में हों या फिर पर्यटक बादलों की गोद में हों। पर्यटकों का यह एहसास बेहद प्रफुल्लित करने वाला होता है। भारत के कर्नाटक के जिला चिकबलपुर का यह शानदार हिल स्टेशन वस्तुत: पहाड़ियों, घाटियों-वादियों वाला इलाका है। 

   बादलों का खिलंदड़पन इस शानदार घाटी की विशेषता है। खास यह कि नंदी हिल्स पर पर्यटक बादलों पर मुग्ध हुये बिना नहीं रह सकते। मन होता है कि बादलों को अपनी गिरफ्त या आगोश में ले लें। समुद्र तल से करीब 4581 फुट की ऊंचाई पर स्थित नंदी हिल्स कर्नाटक का मुख्य पर्यटन स्थल है।

   नंदी हिल्स का शानदार प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। विशेषज्ञों की मानें तो नंदी हिल्स का आकार-प्रकार एक सोते हुये नंदी अर्थात बैल की भांति है। लिहाजा इसे नंदी हिल्स के नाम से जाना पहचाना जाता है। इस सुरम्य एवं शांत हिल स्टेशन को प्राचीन काल में आनन्दगिरि के नाम से ख्याति हासिल थी।

   चोल राजवंश के शासनकाल में इस हिल स्टेशन को एक आदर्श स्थान का दर्जा दिया गया। नंदी हिल्स खास तौर से अपनी पौराणिकता एवं ऐतिहासिकता केे लिए भी जाना पहचाना जाता है। नंदी हिल्स पर प्राचीन काल के मंदिरों एवं ऐतिहासिक इमारतों की दर्शनीयता खास है। 

   नंदी हिल्स पर एक खास दुर्ग भी है। इसकी स्थापत्य कला अद्भुत एवं विलक्षण है। विशेषज्ञों की मानें तो इस विशाल दुर्ग का निर्माण टीपू सुल्तान ने किया था। इसे नंदी दुर्ग के नाम से जाना पहचाना गया। 

  समुद्र तल से करीब 1450 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह दुर्ग एक ऐतिहासिक संरचना है। हालांकि ब्रिाटिश शासनकाल में इस विशाल दुर्ग का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया। नंदी दुर्ग वस्तुत: टीपू सुल्तान का ग्रीष्मकालीन महल हुआ करता था।
   खास यह कि नंदी हिल्स पर स्थापत्य कला को दर्शित करने वाले कई सुन्दर मंदिर भी हैं। इनमें खास तौर से वीरभद्र स्वामी का मंदिर विशेष ख्याति रखता है।

  चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा रखने वाला नंदी हिल्स सुन्दर एवं आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंृखला रखता है। अमृत सरोवर एवं हार्टीकल्चल गार्डेन खास तौर से नंदी हिल्स की शान में चार चांद लगा देते हैं। 

  पैराग्लाइडिंग एवं साइकिलिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए नंदी हिल्स किसी स्वर्ग से कम नहीं है। मानसून के मौसम में नंदी हिल्स का प्राकृतिक सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है। 

   दक्षिण भारत का यह शानदार हिल स्टेशन घाटियों-वादियों एवं मखमली ढ़लानों के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है। नंदी हिल्स एवं आसपास झीलों-झरनों एवं जलाशयों की शानदार श्रंृखला नंदी हिल्स को काफी कुछ खास बना देती है।

   नंदी हिल्स को सनसेट प्वाइंट के रूप में भी खास तौर से जाना जाता है। नंदी हिल्स से सूूर्योदय एवं सूर्यास्त की निराली छटा दिखती है। नंदी हिल्स का सूर्योदय एवं सूर्यास्त अपनी विशिष्ट छटा से एक अलग ही दर्शनीयता देता है। नंदी हिल्स कई नदियों का उद्गम स्थल भी है। 

   इनमें खास तौर से अर्कवती, पेन्नार, पोन्नैयार, पलार नदियां हैं। नंदी हिल्स की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से जून की अवधि है। चिकबलपुर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नंदी हिल्स एक आदर्श हिल स्टेशन के तौर पर ख्याति रखता है।

    नंदी हिल्स की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बेंगलुरू एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन चिकबलपुर जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से नंदी हिल्स की दूरी करीब 19 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नंदी हिल्स की यात्रा कर सकते हैं।
13.408680,77.713850

Friday, 13 September 2019

शिमोगा हिल स्टेशन: झीलों-झरनों का संगम

   शिमोगा हिल स्टेशन को बादलों एवं झीलों-झरनों का अद्भुत एवं विलक्षण संगम कहा जाना चाहिए। इसे प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुपम संगम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।

   चौतरफा हरितिमा का सौन्दर्य परिवेश को आैर भी सुन्दर बना देता है। भारत के कर्नाटक के जिला शिमोगा यह शानदार हिल स्टेशन वस्तुत: पश्चिमी घाट का प्रवेश द्वार माना जाता है। शिमोगा को शिवमोग्गा के नाम से भी जाना पहचाना जाता है।
  समुद्र तट से करीब 569 मीटर ऊंचाई पर स्थित शिमोगा हिल स्टेशन को धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व भी हासिल है। धान की फसल एवं नारियल के पेड़ों का सौन्दर्य बेहद लुभाता है।

  पश्चिमी घाटों का यह शानदार हिल स्टेशन चिकमंगलूर से करीब 97 किलोमीटर दूर स्थित है। मखमली घास के विशाल मैदान एवं चारागाह पर्यटकों को एक सुखद एहसास कराते हैं। शिमोगा हिल स्टेशन खास तौर से झीलों-झरनों एवं शानदार नदियों के लिए जाना पहचाना जाता है।

  मसलन सागर फॉल्स, कोडाचादरी फॉल्स, जोग फॉल्स, अंगुगे फॉल्स आदि इत्यादि शिमोगा हिल स्टेशन की शान एवं शोभा हैं। भद्रा बांध भी शिमोगा हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। पर्यटक भद्रा वन्य जीव अभयारण्य में बेहद अविस्मरणीय रोमांच का एहसास कर सकते हैं। 

   तुंगा नदी के तट पर स्थित शिमोगा हिल स्टेशन कर्नाटक का मुख्य आकर्षण है। चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा पर्यटकों को एक खास रोमांच से भर देती है। इसे बादलों का आशियाना भी कहा जा सकता है। 

   बादलों का स्पर्श बेहद रोमांचक एहसास कराता है। बादलों के साथ चहलकदमी बेहद प्रफुल्लित करती है। पहाड़ों एवं वादियों-घाटियों वाले इस इलाके में पर्यटक एक विशिष्ट ऊर्जा का एहसास करते हैं। 

   तुंगा नदी के विशाल तट पर स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा अति दर्शनीय है। यह स्थान वस्तुत: धार्मिक पर्यटन के तौर पर ख्याति रखता है। चौतरफा हरितिमा का आच्छादन पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। शिमोगा हिल स्टेशन वस्तुत: शिमोगा शहर के निकट है। लिहाजा शहरी आवरण का आनन्द भी पर्यटक उठा सकते हैं। 

   शिमोगा में पौराणिक इमारतों का वास्तुशिल्प अति दर्शनीय है। इमारतों की नक्काशी एवं परिवेश अति लुभावना है। झीलों-झरनों का सौन्दर्य देखते ही बनता है। आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र शिमोगा हिल स्टेशन की शान एवं शोभा हैं। 

   आैषधीय वनस्पतियों एवं फूलों की सुगंध शिमोगा हिल स्टेशन के परिवेश को महका देती है। लिहाजा शिमोगा हिल स्टेशन पर पर्यटक एक सुखद एहसास के साथ ही आनन्द की सुखद अनुभूति करते हैं। 
   जोग फॉल्स: जोग फॉल्स शिमोगा हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। यह शिमोगा हिल स्टेशन के अति खूबसूरत स्थलों में से एक है। शिमोगा से करीब 105 किलोमीटर दूर स्थित जोग फॉल्स बेहद रोमांचक है। ऊंचाई से गिरने वाला यह फॉल्स एक सुमधुर संगीत पैदा करता है। यह एक सम्मोहन जैसा होता है।
   इसे जोगाडा गंुड़ी झरना सहित कई नामों से जाना पहचाना जाता है। जोग फॉल्स भारत के प्रसिद्ध फॉल्स में से एक है। इसे कर्नाटक के शीर्ष पर्यटन स्थल के तौर पर माना जाता है। शारवती नदी का हिस्सा यह वॉटर फॉल्स करीब 253 मीटर ऊंचाई से नीचे गिरता है। खास यह कि यह चार अलग-अलग धाराओं में गिरता है। इसे राजा, रानी, रोवर एवं रॉकेट कहते हैं। 
   भद्रा बांध: भद्रा बांध भी शिमोगा हिल स्टेशन का एक मुख्य आकर्षण है। शिमोगा हिल स्टेशन के लक्षावल्ली गांव में स्थित भद्रा बांध एक आदर्श पिकनिक स्पॉट है। 
  बांध से चौतरफा पर्वत मालाओं का अद्भुत दृश्य दिखता है। जलाशयों के छोटे-छोटे द्वीप बेहद सुन्दर प्रतीत होते हैं। इनमें पक्षियों का प्रवास भी रहता है। पर्यटक यहां नौकायन का आनन्द ले सकते हैं।

   भद्रा वन्य जीव अभयारण्य: भद्रा वन्य जीव अभयारण्य शिमोगा हिल स्टेशन का एक खास आकर्षण है। करीब 195 हेेक्टेयर में फैले इस अभयारण्य में एशियाई शेरों एवं बंगाल टाइगर का अपना एक अलग आकर्षण है। 
   शिमोगा हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट हुबली एयरपोर्ट है। हुबली एयरपोर्ट से शिमोगा हिल स्टेशन की दूरी करीब 204 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन शिमोगा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी शिमोगा हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
13.933710,75.573040

Sunday, 8 September 2019

मदिकेरी हिल स्टेशन : बादलों से दोस्ती

   मदिकेरी हिल स्टेशन को प्रकृति की गोद कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, खास तौर से मदिकेरी हिल स्टेशन पर बादलों की दोस्ती अत्यधिक रोमांचक होती है। 

   बादलों का यह रोमांच पर्यटक कभी भूल नहीं पाते। समुद्र तल से करीब 1525 मीटर ऊंचाई पर स्थित मदिकेरी हिल स्टेशन बेहद शांत एवं शीतल हिल स्टेशन है। 
  भारत के प्रांत कर्नाटक के जिला कोडागु स्थित यह शानदार एवं सुन्दर हिल स्टेशन अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए वैश्विक ख्याति रखता है। शायद सुरम्यता एवं प्राकृतिक सौन्दर्य की विशिष्टता के कारण ही मदिकेरी हिल स्टेशन को दक्षिण भारत का स्कॉटलैण्ड कहा जाता है। 

   मदिकेरी हिल स्टेशन पर बादलों की घुमक्कड़ी पर्यटकों को रोमांचित कर देती है। बादलों के आगोश में ऊंची-ऊंची पर्वत श्रंखलायें बेहद दर्शनीय प्रतीत होती हैं। आैषधीय वनस्पतियों के पेड़-पौधों की विशाल श्रंृखला मदिकेरी हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। 
  चाय एवं कॉफी के बागान मदिकेरी हिल स्टेशन की शान एवं शोभा हैं। चाय एवं कॉफी की सुगंध से परिवेश हमेशा महकता रहता है। यह सुगंध पर्यटकों के दिल एवं दिमाग को एक खास ताजगी प्रदान करते हैं। 

   मदिकेरी हिल स्टेशन खास तौर से चाय एवं कॉफी के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। मदिकेरी हिल स्टेशन को प्रकृति का दुर्लभ उपहार कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
 शायद यहां का दुर्लभ प्राकृतिक सौन्दर्य ही इसे अविस्मरणीय पर्यटन बना देता है। झील-झरना एवं नदियां मदिकेरी हिल स्टेशन की शान एवं शोभा हैं। झरनों की ध्वनि किसी सुमधुर संगीत से कम नहीं। ऐसा प्रतीत होता है कि विशिष्ट प्रकार की संगीत राग रागिनी छेड़ रहा हो। 

   मदिकेरी हिल स्टेशन एवं आसपास पौराणिक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। विशेषज्ञों की मानें तो लिंगायत राजाओं ने कोडागु में राज किया था। इस दौरान लिंगायत राजाओं ने मदिकेरी को राजधानी बनाया था। कारण लिंगायत राजा मदिकेरी के प्राकृतिक सौन्दर्य पर मुग्ध थे। शासन के दौरान मदिकेरी किला का निर्माण किया गया था। 

  मदिकेरी हिल स्टेशन एवं आसपास आकर्षक एवं सुन्दर स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से अब्बे झरना, मदिकेरी किला, राजा की सीट, भागमण्डल, नागरहोले राष्ट्रीय उद्यान, ओंकारेश्वर मंदिर, झरप्पु झरना, तलकावेरी, हारंगी बांध, नाल्कनाड महल आदि इत्यादि हैं।
   मदिकेरी किला: मदिकेरी किला वस्तुत मिट्टी का शानदार किला है। हालांकि बाद में शासक टीपू सुल्तान ने इसे मिट्टी से बदल कर पत्थरों का किला बनाया था। इस दिव्य-भव्य किला में लिंगायत शासकों के महल भी हैं। 
   अब्बे वॉटर फॉल्स : अब्बे वॉटर फॉल्स मदिकेरी हिल स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर दूर एक शानदार एवं आदर्श पिकनिक स्पॉट है। चाय बागान के आंतरिक क्षेत्र का यह झरना इलाके की खास खूबसूरती है। मानसून में इस झरना का प्राकृतिक सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है। 
   राजा की सीट: राजा की सीट एक अनुपम एवं आदर्श स्थान है। इसे सनसेट प्वाइंट भी कहते हैं। इस स्थान से सूर्यास्त एवं सूर्योदय की इन्द्रधनुषी एवं निराली छटा दिखती है। यह दृश्य अति दर्शनीय होता है। 
   कोडागु के राजा इस स्थान पर बैठ कर सूर्योेदय एवं सूर्यास्त का इन्द्रधनुषी का रंग देखते थे। यहां से प्रकृति का सुन्दर नजारा भी दिखता है। राजा की सीट के निकट ही चोटी मरियम्मा का मंदिर है। यह एक अति प्राचीन मंदिर है।

   भागमण्डल: भागमण्डल मदिकेरी हिल स्टेशन से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे दक्षिण काशी भी कहा जाता है। भगंद महर्षि ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। 
   लिहाजा इसे भागमण्डल कहा जाता है। तलकावेरी से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भागमण्डल के आसपास महाविष्णु, सुब्रामण्यम एवं गणपति मंदिर हैं। 
   नागरहोले राष्ट्रीय उद्यान: नागरहोले राष्ट्रीय उद्यान रोमांचक वन्य जीव क्षेत्र है। मदिकेरी हिल स्टेशन से करीब 93 किलोमीटर दूर स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान में हाथी, हिरन, जंगली भालू, भेड़िया आदि इत्यादि वन्य जीव हैं। करीब 284 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैले इस वन्य जीव अभयारण्य में आैषधीय वनस्पतियों की भी प्रचुरता है।
   ओंकारेश्वर मंदिर: ओंकारेश्वर मंदिर वस्तुत: भगवान शिव एवं विष्णु जी को समर्पित है। कोडागू के राजा लिंगराज ने इस दिव्य भव्य मंदिर का निर्माण 1820 में कराया था। 
  मस्जिदाकार शैली में बना यह मंदिर खास आकर्षण रखता है। मंदिर के सामने एक विशाल जलाशय है। इस जलाशय को वास्तुशास्त्र की दृष्टि से बेहतरीन माना जाता है। 
   झरप्पुु झरना: झरप्पु झरना वस्तुत: एक तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। मदिकेरी हिल स्टेशन से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित झरप्पु झरना का सम्बंध रामायण काल से माना जाता है। रामतीर्थ नदी के किनारे भगवान शिव का मंदिर भी है। महाशिव रात्रि पर यहां लाखों श्रद्धालु स्नान करतेे हैं।
   तलकावेरी: तलकावेरी वस्तुत: कावेरी नदी का उद्गम स्थल है। मदिकेरी हिल स्टेशन से करीब 48 किलोमीटर दूर स्थित तलकावेरी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। यह स्थान ब्राह्मगिरी पर्वत की ढ़लान पर स्थित है। समुद्र तल से करीब 4500 फुुुट की ऊंचाई पर स्थित तलकावेरी अति दर्शनीय एवं रोमांचक है।
   हारंगी बांध: हारंगी बांध मदिकेरी हिल स्टेशन सेे करीब 36 किलोमीटर दूर स्थित है। हारंगी चाय एवं कॉफी के बागानों के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। हारंगी बांध एक दर्शनीय एवंं सुन्दर पिकनिक स्पॉट है। कावेरी नदी पर बना यह शानदार बांध 2775 फुट लम्बा एवं 174 फुट ऊंचा है।
   नाल्कनाड महल: नाल्कनाड महल कोडागू की सबसे ऊंची पहाड़ी पर बना एक शानदार महल है। मदिकेरी हिल स्टेशन से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित इस महल का निर्माण 1792 में दोड्डा वीरराज ने कराया था। महल का वास्तुशिल्प एवं चित्रांकन अति दर्शनीय है।
   मदिकेरी हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैंं। निकटतम एयरपोर्ट मंगलोर एयरपोर्ट है। मंगलोर एयरपोर्ट से मदिकेरी हिल स्टेशन की दूरी करीब 135 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कन्नूर जंक्शन है। कन्नूर रेलवे स्टेशन से मदिकेरी हिल स्टेशन की दूरी करीब 113 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मदिकेरी हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
12.432500,75.751600

फागू हिल स्टेशन: रोमांचक एहसास    फागू हिल स्टेशन निश्चय ही दिल एवं दिमाग को एक सुखद शांति एवं शीतलता प्रदान करेगा। फागू हिल स्टेशन आकार...