Friday, 21 June 2019

ताबो हिल स्टेशन: धरती का स्वर्ग

   ताबो हिल स्टेशन के प्राकृतिक सौन्दर्य का कोई जोड़ नहीं। जी हां, ताबो का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। इसे धरती का स्वर्ग लोक भी कह सकते हैं।

   भारत के हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिला का एक छोटा शहर ताबो ने प्राकृतिक सौन्दर्य से एक शानदार हिल स्टेशन का बेहतरीन स्वरूप ले लिया। वस्तुत: हिमाचल प्रदेश का यह शहर स्पीति नदी के तट पर रचा-बसा ताबो अति दर्शनीय एवं सुन्दर है। 

  समुद्र तल से करीब 3050 मीटर ऊंचाई पर स्थित ताबो वस्तुत: रेककौंग पियो एवं काजा सड़क के मध्य स्थित है। हिमालय की गोद में रचा-बसा यह शानदार शहर धार्मिक शहर की छवि भी रखता है। खास यह कि ताबो वस्तुत: प्रसिद्ध मठ ताबो गोम्पा के चारों ओर बसा है। 

  ताबो गोम्पा मठ की मान्यता है कि यह मठ हिमालय क्षेत्र का सबसे बड़ा दूसरा मठ है। ताबो मठ परिसर में नौ देवालय हैं। इनमें चुकलाखण्ड, सेरलाखण्ड एवं गोन्खण्ड मुख्य हैं। चुकलाखण्ड में भगवान गौतम बुद्ध को समर्पित भित्ति चित्र दीर्घा है। इसमें बुद्ध के जीवन दर्शन को रेखांकित किया गया है। 

  ताबो गोम्पा मठ के सामने ही एक अति दर्शनीय प्राकृतिक गुफा है। इन गुफाओं में एक गुफा गांव से अलग है। इस गुफा को फू के नाम से जाना पहचाना जाता है। इन गुफाओं की दीवारों पर दर्शनीय चित्र अंकित हैं। 

  खास यह कि इनमें पशुओं के चित्र भी शामिल हैं। चौतरफा पर्वत मालाओं से घिरा ताबो हिल स्टेशन वस्तुत: प्रकृति की गोद होने का रोमांचक एहसास कराता है। झीलों-झरनों एवं नदियोें से आच्छादित ताबो एक शीतल एवं शांत हिल स्टेशन है। 

   चौतरफा हिम शिखर का प्राकृतिक सौन्दर्य ताबों की सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं तो वहीं आैषधीय वनस्पतियों का सघन वन क्षेत्र वातावरण को आैर भी अधिक ऊर्जावान बना देता है। ताबो भले ही छोटा शहर हो लेकिन ताबो हिल स्टेशन की दिव्यता-भव्यता एवं दर्शनीयता विलक्षण है। 

   नदी की निर्मलता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। पर्यटक स्पीति नदी में जलक्रीड़ा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। पर्यटक ताबो हिल स्टेशन पर वन्य जीवन के रोमांच की सुखद अनुभूति कर सकते हैं।
  आैषधीय वनस्पतियों के सघन वन क्षेत्र में हिम तेंदुआ, बाघ, भालू एवं अन्य जंगली जीव-जन्तुओं का स्वच्छंद विचरण पर्यटकों को रोमांचित करता है।

  सर्दियों में ताबो हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है। कारण सर्दियोंं में चौतरफा बर्फ की चादर दिखती है। इस बर्फबारी से शहर के सौन्दर्य की एक अनोखी आभा निखरती है। 

  ताबो हिल स्टेशन एवं आसपास शानदार एवं सुन्दर स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। इनमें खास तौर से काजा, किब्बर, की, डंखर, पिन वैली नेशनल पार्क आदि इत्यादि अति दर्शनीय हैं। 
   किब्बर: किब्बर वस्तुत: काजा से उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। समुद्र तल से करीब 13796 फुट की शीर्ष ऊंचाई पर स्थित एक शानदार स्थान है। यहां का लदारचा मेला अति प्रसिद्ध है। इस दिव्य-भव्य मेला में बौद्ध धर्म के अनुयायी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। 
  पिन वैली नेशनल पार्क: पिन वैली नेशनल पार्क ताबो हिल स्टेशन की शान एवं शोभा है। वस्तुत: इसे बर्फीले तेंदुओं की धरती कहा जाता है। खास यह कि इस इलाके में जंगली बकरों की भी बहुलता है। 
  लिहाजा इसे जंगली बकरों के लिए भी जाना पहचाना जाता है। यह नेशनल पार्क दक्षिणी धनकर में स्थित है। करीब 675 वर्ग किलोमीटर में फैले इस सुन्दर पार्क में बर्फीले तेंदुआ के अलावा भी अन्य जीव जन्तु हैं। इस पार्क के निकट ही करीब 600 वर्ष प्राचीन कुंगरी गोम्पा मठ है।

   ताबो हिल स्टेशन की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जुबरहट्टी एयरपोर्ट शिमला है। निकटतम रेलवे स्टेशन कालका जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी ताबो हिल स्टेेशन की यात्रा कर सकते हैं।
32.431030,77.206886

Friday, 14 June 2019

धर्मकोट हिल स्टेशन: सौन्दर्य का इन्द्रधनुुषी रंग

   धर्मकोट हिल स्टेशन को प्राकृतिक सौन्दर्य का इन्द्रधनुषी रंग कहा जाना चाहिए। जी हां, धर्मकोट हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   शायद यही कारण है कि धर्मकोट वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करता है। भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला का यह शानदार एवं सुन्दर हिल स्टेशन अपने शांत परिवेश एवं सुरम्यता के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। 

   खास तौर से धर्मकोट हिल स्टेशन पर्वतीय सौन्दर्य का शानदार आयाम है। पर्वत श्रंखला से घिरा यह सुन्दर हिल स्टेशन पर्यटकों को एक शांत सुरम्यता प्रदान करता है। आैषधीय वनस्पतियों का सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को भरपूर आक्सीजन प्रदान करता है। 

   लिहाजा पर्यटकों को एहसास होता है कि जैसे फेफड़ों को पंख लग गये हों। धर्मकोट हिल स्टेशन से पर्यटक हिमालय के सौन्दर्य का शानदार दर्शन कर आनन्द एवं रोमांच की अनुभूति कर सकते हैं। घाटियों-वादियों का भरपूर आनन्द पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देता है। 

   मखमली घास के विहंगम मैदान एवं ढ़लान पर्यटकों को सुखद अनुभूति कराते हैं। पर्यटकों को धर्मकोट हिल स्टेशन की यात्रा मार्च से लेकर सितम्बर की अवधि के मध्य करनी चाहिए। बर्फबारी का आनन्द लेना हो तो सर्दियों में धर्मकोट हिल स्टेशन का रूख करना चाहिए। सर्दियों में चौतरफा बर्फ की चादर दिखती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पर्यटक किसी अन्य लोक में हों।

  धर्मकोट हिल स्टेशन में विपश्यना केन्द्र, धम्म शिकारा, तुशिता ध्यान केन्द्र, बौद्ध धर्म अध्ययन केन्द्र आदि इत्यादि बहुत कुछ है। 

   समुद्र तल से करीब 2842 मीटर ऊंचाई पर स्थित धर्मकोट हिल स्टेशन अपने आसपास आकर्षक स्थानों की शानदार श्रंखला रखता है। इनमें खास तौर से मैक्लोड़गंज, त्रिउन्द, कांगड़ा किला, देवी हिमानी चामुण्डा आदि इत्यादि हैं।
   मैक्लोड़गंज: मैक्लोड़गंज धर्मकोट हिल स्टेशन से करीब 9 किलोमीटर दूर है। इस स्थान के उपरी क्षेत्र को धर्मशाला माना जाता है। खास यह कि इस इलाके में ब्रिटिश काल की इमारतों एवं सुन्दर चर्च का वास्तुशिल्प अति दर्शनीय है।

    ब्रिटिश अफसर लॉर्ड एलगिन को यह इलाका बेहद पसंद था। खास यह कि मैक्लोड़गंज में कई प्रसिद्ध बौद्ध मठ एवं सुन्दर मंदिर हैं। यहां एक बौद्ध संग्रहालय भी है। इस शानदार संग्रहालय में तिब्बत की कला एवं संस्कृति के शानदार दर्शन किये जा सकते हैं। प्राचीन किला भी यहां की शान एवं शोभा हैं। 
  त्रिउन्द: त्रिउन्द वस्तुत: धौलाधार पर्वत श्रंखला की गोद में रचा बसा यह एक सुन्दर एवं प्राचीन गांव है। ट्रैकर्स के लिए त्रिउन्द किसी स्वर्ग की भांति है। समुद्र तल से करीब 2842 मीटर ऊंचाई पर स्थित त्रिउन्द गांव वस्तुत: लोक संस्कृति को रेखांकित करता है। हिमालय की पर्वत श्रंखला के सौन्दर्य का शानदार दर्शन त्रिउन्द से किया जा सकता है। धर्मकोट हिल स्टेशन की यात्रा के साथ त्रिउन्द की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। 
   कांगड़ा किला: कांगड़ा किला वस्तुत: हिमाचल की प्राचीन धरोहर है। इसका वास्तुशिल्प अति दर्शनीय है।
  देवी हिमानी चामुण्डा: देवी हिमानी चामुण्डा की यात्रा पर्यटक देवी दर्शन कर सकते हैं। समुद्र तल से करीब 10500 फुट की ऊंचाई पर स्थित देवी हिमानी चामुण्डा का यह मंदिर कांगड़ा के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। 

  मान्यता है कि चामुण्डा देवी के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं का कल्याण होता है। देवी चामुण्डा के अलावा यहां भगवान शिव एवं भगवान हनुमान जी को समर्पित दो अन्य मंदिर भी हैं।

   धर्मकोट हिल स्टेशन की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट धर्मशाला एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन पठानकोट जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी धर्मकोट हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
32.101500,76.273200

Thursday, 13 June 2019

रामगढ़ हिल स्टेशन: मखमली एहसास

   रामगढ़ हिल स्टेशन को फलों का बगीचा कहा जाना चाहिए। जी हां, रामगढ़ हिल स्टेशन की शोभा एवं शान स्वादिष्ट एवं रसीले फलों का उत्पादन है। 

   वस्तुत: रामगढ़ भारत के उत्तराखण्ड के नैनीताल जिला का एक शानदार एवं उभरता हिल स्टेशन है। समुद्र तल से करीब 2300 मीटर ऊंचाई पर स्थित रामगढ़ हिल स्टेशन अपने नैसर्गिक सौन्दर्य के लिए विख्यात है। 

   खास यह कि रामगढ़ से हिमालय के विराट सौन्दर्य दर्शन होते हैं। चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य का मखमली एहसास होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे प्रकृति की गोद में हों। भवाली से भीमताल की ओर कुछ दूर चलने पर बायीं ओर जाने वाला मार्ग रामगढ़ को जाता है।

   खास यह मार्ग भी अति सुन्दर एवं दर्शनीय है। इसे भवाली-मुक्तेश्वर मार्ग भी कहते हैं। यहां गागर नामक स्थान से हिमालय के दिव्य एवं भव्य दर्शन  होने लगते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो गागर पर्वत पर ऋषि गर्गाचार्य ने तपस्या की थी। लिहाजा इस स्थान को गागर पर्वत के नाम सेे जाना पहचाना जाता है। 

   खास गागर की इस पर्वत चोटी पर गर्गेश्वर महादेव का शिवालय अर्थात मंदिर है। महाशिवरात्रि पर यहां विशाल उत्सव होता है। नैनीताल से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित रामगढ़ हिल स्टेशन फलों की राजधानी के तौर पर जाना पहचाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इसे कुमाऊं का फ्रूट बाउल भी कहा जाता है। 

   भुवाली-रामगढ़ इलाके में खास तौर से फलों का उत्पादन होता है। पिछौला सेब रामगढ़ हिल स्टेशन की खास पहचान है। बर्फ पड़ने के बाद सबसे पहले पकने वाला सेब पिछौला होता है। इसके अलावा डिलिशियस, गोल्डन किंग, फैनी एवं जोनाथन जाति के श्रेष्ठतम फल का उत्पादन इस क्षेत्र में होता है।
   आडू रामगढ़ हिल स्टेशन का सर्वोत्तम फल माना जाता है। तोतापरी, हिल्सअर्ली एवं गौला आडू का उत्पादन अधिक होता है। पुलम को यहां का विशेष फल माना जाता है।
   रामगढ़ हिल स्टेशन पर प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ ही पौराणिकता एवं प्राचीन इतिहास भी छिपा है। रामगढ़ की पर्वत चोटी का बंगला भी साहित्यक धरोहर के तौर पर देखा जाता है। 
  विशेषज्ञों की मानें तो विश्वकवि रविन्द्र नाथ टैगोर इस बंगला में अक्सर प्रवास करते थे। रविन्द्र नाथ टैगोर की स्मृति में इस बंगले को टैगोर टॉप के नाम से जाना पहचाना जाता है। 

  विशेषज्ञों की मानें तो आचार्य नरेन्द्र देव ने बौद्ध दर्शन ग्रंथ को अंतिम रूप यहीं दिया था। खास यह कि रामगढ़ हिल स्टेशन सदैव साहित्यकारोंं को आकर्षित करता रहा। स्वर्गीय महादेवी वर्मा ने बाकायदा रामगढ़ में आवास बनाया था।

   कुमाऊं के इस फ्रूट बाउल को नैसर्गिक सौन्दर्य के मध्य कुछ अलग ही अंदाज में देखा जाता है। चौतरफा आैषधीय वनस्पतियों का आच्छादन पर्यटकों को विशेष ऊर्जा प्रदान करता है। पर्वत मालाओं से घिरा रामगढ़ हिल स्टेशन बेहद शांत एवं शीतल जलवायु वाला क्षेत्र है। 

  फल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रामगढ़ हिल स्टेशन को खास तौर पर दो हिस्सों में देखा जाता है। इसे मल्ला एवं तल्ला के तौर पर जाना पहचाना जाता है। मल्ला को उपरी रामगढ़ एवं तल्ला को निचला रामगढ़ के तौर पर जाना पहचाना जाता है। इसका निचला तल्ला समुद्र तल से करीब 1518 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 

   प्रकृति प्रेमियों के लिए इसे आदर्श हिल स्टेशन के तौर पर माना जाता है।हिमालय की विलक्षण एवं अद्भुत खूबसूरती रामगढ़ हिल स्टेशन की शोभा एवं शान है। पर्यटक प्रकृति के हर अंदाज के बीच अपना शौक पूरा कर सकते हैं। साहसिक रोमांचक खेलों का शौक है तो राजगढ़ हिल स्टेशन बेहतरीन है। 

   बादलों के साथ तो पर्यटक रामगढ़ हिल स्टेशन पर दोस्ताना हो जाते हैं। बादलों की आवाजाही रामगढ़ हिल स्टेशन पर खास है। पर्यटक कभी बादलों की गोद में होते हैं तो बादल पर्यटकों की गोद में होेते हैं। बादलों का यह खिलंदड़पन पर्यटकों को पुलकित कर देता है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान रामगढ़ हिल स्टेशन ब्रिटिश छावनी भी रह चुका है। 

   खास यह कि रामगढ़ हिल स्टेशन पक्षियों का घरौैंदा भी है। पक्षी विहार रामगढ़ हिल स्टेशन की शान एवं शोभा है। पर्यटक यहां ट्रैकिंग का रोमांचक एहसास कर सकते हैं।
   आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र ट्रैकिंग के आनन्द को दोगुना कर देते हैं। यहां की शांत एवं शीतल जलवायु पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करती है। वर्ष पर्यंत रामगढ़ हिल स्टेशन की जलवायु खुशनुमा रहती है।
  रामगढ़ हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पंतनगर एयरपोर्ट है। पंतनगर एयरपोर्ट से रामगढ़ हिल स्टेशन की दूरी करीब 76 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी रामगढ़ हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
29.275264,79.493416

Wednesday, 12 June 2019

शोघी हिल स्टेशन : बादलों का रोमांचक एहसास

   शोघी हिल स्टेशन को धार्मिक हिल स्टेशन कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, इस छोटे शहर में मंदिर एवं धार्मिक स्थलों की एक लम्बी श्रंखला है। 

   शायद इसी लिए इसे धार्मिक हिल स्टेशन कहा जाना कहा जाना चाहिए। खास यह कि भारतीय आम जनमानस में धार्मिक यात्राओं के प्रति कुछ खास एवं अलग उत्साह होता है।
   भारत में असंख्य धार्मिक स्थान हैं। इन स्थानों की यात्राओं से देवी देवताओं के दर्शन पूजन-पाठ के साथ ही घूमना-फिरना एवं सैर सपाटा हो जाता है। 

   खास यह कि यह धार्मिक यात्रायें दुश्कर भले ही हों लेेकिन श्रद्धालुओं या पर्यटकों के चेहरों पर अंश मात्र की थकान या परेशानी नहीं होती। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देव स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। शोघी हिल स्टेशन भी इसी श्रंखला का एक शानदार शहर है। वस्तुत: इसे मंदिरों का शहर कहा जाना चाहिए। 

  भारत के हिमाचल प्रदेश के शिमला का उप नगर शोघी एक छोटा शहर है। इस छोटे शहर ने धार्मिक हिल स्टेशन का स्वरूप ग्रहण कर लिया। शोघी हिल स्टेशन भले ही छोटा हिल स्टेशन है लेकिन इसका प्राकृतिक सौन्दर्य बेहद आकर्षक है। 

   शिमला से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित शोघी हिल स्टेशन प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ ही काफी कुछ निराला है। शोघी के चौतरफा हरी-भरी वादियां, आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र, पर्वत श्रंखलाओं का आच्छादन हिल स्टेशन को बेहद लुभावना बना देता है। 

  शांत वातावरण, शीतलता से परिपूरित परिवेश, प्राकृतिक सम्पदाओं की विशालता इस शांत एवं छोटे हिल स्टेशन को आदर्श बना देती है। शोघी हिल स्टेशन एक ऐसा विशेष एरिया है, जहां हर कुछ कदमों पर एक भव्य-दिव्य देवालय दर्शित होगा।

   देवी देवताओं के दर्शन से श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के मन मस्तिष्क को एक शांति मिलती है। ऐसा प्रतीत होता है कि देवगण खुद शोघी की इस मनोरम सतत यात्रा पर साथ हैं। 

   शोघी हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण तारा देवी का मंदिर है। माता तारा देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम निरन्तर वर्ष पर्यंत उमड़ता रहता है। मान्यता है कि माता तारा देवी के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के कष्टों का निवारण हो जाता है। 

   वस्तुत: शोघी हिल स्टेशन को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। तारा देवी का मंदिर यहां का खास आकर्षण हैै। जाखू मंदिर, काली मंदिर, हनुमान मंदिर आदि सहित धार्मिक स्थलों की यहां एक लम्बी श्रंखला है। मुख्य आकर्षण देखें तो वाइसरेलगल लॉज व कंड़ा घाट यहां के मुख्य आकर्षण है।

    शिमला से करीब 13 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे पर स्थित शोघी हिल स्टेशन शहर की भीड़ भाड़ से दूर एक बेहद शांत एवं सुरम्यता से परिपूरित हिल स्टेशन है। पर्यटक यहां खास तौर से प्रकृति की गोद में होने का एहसास करते हैं। 

   समुद्र तल से करीब 5700 फुट की ऊंचाई पर स्थित शोघी हिल स्टेशन फलों एवं फलों के ताजे रस के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटक शोघी पर हिल स्टेशन का भरपूर आनन्द लेे सकते हैं तो वहीं ताजे फल एवं फलों के ताजे रस का भरपूर स्वाद ले सकते हैं। खास यह कि शोघी हिल स्टेशन फलों का ताजा रस उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। 

   इतना ही नहीं, शोघी हिल स्टेशन ट्रैकिंग एवं कैम्पेनिंग के लिए भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। आैषधीय वनस्पतियों के सघन वन क्षेत्र मेें कैम्पेनिंग का अपना एक अलग ही आनन्द है। 
  पर्वत की चोटी पर बसा शोघी हिल स्टेशन फोटोग्राफी के लिए भी बेहद सुन्दर एवं शानदार स्थान है। पक्षियों का कलरव-कोलाहल परिवेश को आैर भी सुन्दर एवं आकर्षक बना देता है। 

   पर्यटकों को शोघी हिल स्टेशन ताजगी युक्त भरपूर आक्सीजन प्रदान करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे फेफड़ों को पंख लग जाते हों। सर्दियों में शोघी हिल स्टेशन पर चौतरफा बर्फ की शानदार चादर दिखती है।
   ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे शोघी ने बर्फ की चादर ओढ़ रखी हो। यह आकर्षण बेहद रोमांचकारी होता है। बादलों के संग सैर का सपना शोघी हिल स्टेशन पर पर्यटक साक्षात अनुभव कर सकते हैं। परिवेश में तैरते बादल रोमांचक एहसास कराते हैं। खास यह कि शोघी हिल स्टेशन का मौसम वर्ष पर्यंत सुहावना रहता है। बुरांश के फूल एवं बलूत के पेड़ शोघी हिल स्टेशन को आैर भी आकर्षक बना देतेे हैं।
  शोघी हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भुंटर एयरपोर्ट शिमला है। शिमला से शोघी हिल स्टेशन की दूरी करीब 47 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन शोघी है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी शोघी हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
31.039036,77.124748

Tuesday, 11 June 2019

सांगला हिल स्टेशन: धरती का ताज

   सांगला घाटी को धरती का ताज कहा जाना चाहिए। जी हां, सांगला घाटी का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   सांगला घाटी अत्यंत रमणीक एवं दर्शनीय है। भारत के हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला का यह सुन्दर हिल स्टेशन वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। नदी, झीलों एवं झरनों का यह शानदार इलाका पर्यटकों कोे एक सुखद शांति प्रदान करता है।

  खास यह कि बस्पा नदी सांगला हिल स्टेशन की शान एवं शोभा है। बस्पा नदी सांगला घाटी से होकर करछम में सतलुज नदी में विलीन हो जाती है। छितकुल भारतीय सीमा का आखिरी गांव है। लिहाजा इस इलाके में भारतीय सीमा को भी पर्यटक देख सकते हैं। 

  ग्लेशियर के शीतल जल वाली नदी बस्पा में पर्यटक मछली का शिकार करने का शौक पूरा कर सकते है। साथ ही इस अति शीतल जल में पर्यटक जलक्रीडा का भी भरपूर आनन्द ले सकते हैं। 

  सांगला हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य अति दर्शनीय है। सर्दियों में बर्फ से ढ़के पर्वत श्रंखला का सौन्दर्य खास हो जाता है।
   चौतरफा पर्वत मालाओं से घिरा सांगला हिल स्टेशन सौन्दर्य का इन्द्रधनुषी आयाम है। सांगला हिल स्टेशन पर चौतरफा सेब, खुमानी, अखरोेट, चिलगोजा एवं अन्य फलों के बाग-बगीचे यहां की शान एवं शोभा हैं।

   खास यह कि सांगला हिल स्टेशन का सेब स्वाद में बेहतरीन होता है। लिहाजा पर्यटक सांगला के फलों का बेहतरीन स्वाद ले सकते हैं। सांगला वस्तुत: इस इलाके का एक अच्छा गांव है। लिहाजा पर्यटकों को खाने पीने के साथ विलेज टूरिज्म का भी भरपूर आनन्द मिलता है। 

  खास यह है कि सांगला हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका रोमांच से भरपूर है। रोमांच की इस शानदार दुनिया में पर्यटक कैम्पेन भी कर सकते है। 
  समुद्र तल से करीब 3450 मीटर ऊंचाई पर स्थित सांगला हिल स्टेशन की शांति एंव शीतलता का एक अलग ही आनन्द है। खुले आसमान के नीचे रात गुजारने का आनन्द ही कुछ आैर होता है। यह इलाका खास तौर से साहसिक खेलों एवं रोमांचक क्रियाकलाप के लिए जाना पहचाना जाता है। 

  सांगला हिल स्टेशन वस्तुत: हिमालय की विलुप्त प्राय वन्य जीवन का संरक्षण क्षेत्र भी है। चौतरफा आैषधीय वनस्पतियों का शानदार खजाना दिखता है। 
  देवदार एवं आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र सांगला हिल स्टेशन की विशेेषता है। घाटियों के नीचे आता बर्फीला पानी, झरनोंं की श्रंखला, पहाड़ों की बर्फ एक अलग ही शोभा को दर्शित करती है।

  सांगला हिल स्टेशन से लेकर छितकुल गांव तक पर्यटकों के लिए होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट एवं ढ़ाबा आदि की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।
   सांगला हिल स्टेशन एवं आसपास शानदार एवं सुन्दर स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। कमरु किला, सांगला बौद्ध मठ, बेरिंग नाथ मंदिर, रकछम गांव, छितकुल गांव आदि इत्यादि बहुत कुछ है।
   कमरु किला: कमरु किला सांगला हिल स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित है। समुद्र तल से करीब 2600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह शानदार किला काफी कुछ विशेषताएं रखता है। खास यह कि इस दिव्य-भव्य किला में अनेक प्रवेश द्वार हैं। मुख्य द्वार पर भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा विद्यमान है। कमरु किला से सांगला हिल स्टेशन का अद्भुत दृश्य दिखता है।
  सांगला बौद्ध मठ: सांगला बौद्ध मठ को बरेेलेंगी गोम्पा भी कहा जाता है। सांगला घाटी का यह प्रसिद्ध गोम्पा माना जाता है। 
  बेरिंग नाग मंदिर: बेरिंग नाग मंदिर वस्तुत: घाटी का प्रमुख धार्मिक स्थान है। यह मंदिर सांगला गांव के मध्य में स्थित है। खास यह कि अगस्त एवं सितम्बर में यहां फुलैच मेला लगता है।
  रकछम गांव: रकछम गांव सांगला हिल स्टेशन के मध्य बसा एक सुन्दर एवं प्राचीन गांव है। रकछम वस्तुत: ग्लेशियर का निकटतम गांव है। रकछम से ग्लेशियर तक का सीधा ट्रैक है। रकछम समुद्र तल से करीब 2900 मीटर की ऊंचाई पर बसा गांव है। 

  छितकुल गांव; छितकुल गांव वस्तुत: भारतीय सीमा का आखिरी गांव है। समुद्र तल से करीब 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित छितकुल गांव वस्तुत: सांगला हिल स्टेशन करीब 23 किलोमीटर दूर है। 
   छितकुल में पहाड़ी शैली में बना मंदिर छितकुल माथी मंंदिर अति दर्शनीय है। यह गांव हिमालय की गोद में बसा एक सुन्दर गांव है। चौतरफा हिमालय की पर्वत चोटियां खास दर्शनीय हैं। 

  सांगला हिल स्टेशन कब जाएं: सांगला हिल स्टेशन की यात्रा तो कभी भी की जा सकती है। यदि बर्फबारी का भरपूर आनन्द लेना हो तो सर्दियों में सांगला हिल स्टेशन का रुख करना चाहिए। सामान्य तौर पर अप्रैल से सितम्बर की अवधि में सांगला हिल स्टेशन की यात्रा करनी चाहिए।
   सांगला हिल स्टेशन की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट शिमला एयरपोर्ट है। शिमला एयरपोर्ट से सांगला हिल स्टेशन की दूरी करीब 267 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी शिमला जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से सांगला हिल स्टेशन की दूरी करीब 244 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सांगला हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
31.425720,78.265430

फागू हिल स्टेशन: रोमांचक एहसास    फागू हिल स्टेशन निश्चय ही दिल एवं दिमाग को एक सुखद शांति एवं शीतलता प्रदान करेगा। फागू हिल स्टेशन आकार...