Monday, 12 August 2019

नागरी हिल स्टेशन: मखमली एहसास

    नागरी हिल स्टेशन के प्राकृतिक सौन्दर्य को प्रकृति का अनुपम उपहार कहा जाना चाहिए। जी हां, नागरी हिल स्टेशन की प्राकृतिक संरचना अद्वितीय एवं विलक्षण है। 

   शायद इसी लिए नागरी हिल स्टेशन पर्यटन प्रेमियों का बेहद पसंदीदा है। भारत के आंध्र प्रदेश के शहर चित्तूर का यह हिल स्टेशन पर्यटकों को एक मखमली एहसास कराता है। समुद्र तल से करीब 855 मीटर ऊंचाई पर स्थित नागरी हिल स्टेशन खास तौर से ऊंची चट्टानों एवं लम्बे चारागाहों वाला इलाका है। 

   खास यह कि नागरी हिल स्टेशन पर बादलों का खिलंदड़पन बेहद रोमांचक एहसास कराता है। बादलों का उमड़ घुमड़ कर आना जाना बेहद लुभावना प्रतीत होता है। बादलों के इस खिलंदड़पन में पर्यटक कभी बादलों की गोद में होते हैं। कभी बादलों का पर्यटकों संग रोमांचक स्पर्श होता है। 

   बादलों की घुमक्कड़ी के यह पल सदैव स्मरणीय रहते हैं। वस्तुत: देखें तो नागरी हिल स्टेशन मानव नाक जैसा प्रतीत होता है। नागरी हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य विस्मयकारी है। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी के शौकीन पर्यटकों के लिए एवं साहसिक खेलों के शौकीन पर्यटकों के लिए नागरी हिल स्टेशन किसी स्वर्ग से कम नहीं है। 

   पर्यटक नागरी हिल स्टेशन पर पर्वतारोहण का भी शौक पूरा कर सकते हैं। कुशस्थली नदी के तट पर स्थित नागरी हिल स्टेशन की इन्द्रधनुषी निराली छटा पर्यटकों को स्वत: मुग्ध करती है। वस्तुत: देखें तो नागरी हिल स्टेशन आंध्र प्रदेश का सर्वाधिक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट माना जाता है।

   कुशस्थली नदी के शीर्ष पर स्थित नागरी हिल स्टेशन की इन्द्रधनुषी निराली छटा अति दर्शनीय प्रतीत होती है। नागरी हिल स्टेशन की पर्वत मालाओं को नागरी मुरकोंडा के नाम से भी जाना पहचाना जाता है।

   आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र एवं कैलासकोेना वॉटर फॉल्स नागरी हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को भरपूर आक्सीजन प्रदान करते हैं। पर्यटकों को ऐसा एहसास होता है कि जैसे फेफड़ों को पंख लग गये हों।

   शांत एवं शीतल हवाओं के मध्य पर्यटक एक खास ताजगी का एहसास करते हैं। पर्यटक यहां से एक सुखद यात्रा का शानदार अनुभव लेकर वापस लौटते हैं। नदियां, झीलें एवं झरनों की श्रंखला नागरी हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण हैं। 

   कैलासकोना वॉटर फॉल्स: कैलासकोना वॉटर फॉल्स नागरी हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। नागरी हिल्स स्थित कैलासकोना फॉल्स की भव्यता-दिव्यता का कोई जोड़ नहीं है। यह एक सदाबहार झरना है। करीब तीस मीटर ऊंचाई से गिरने वाले इस झरने की प्रतिध्वनि किसी सुमधुर संगीत की भांति है। 

   विभाजित पथरीली चट्टानों से निकलने वाला यह वॉटर फॉल्स अति दर्शनीय है। खास यह कि इसका जल नागरी हिल स्टेशन की शान एवं सुन्दरता को आैर भी बढ़ाता है। 

   इस वॉटर फॉल्स के जल में आैषधीय एवं खनिज तत्व उपलब्ध हैं। जिससे कैलासकोना वॉटर फॉल्स का जल आैषधीय गुण वाला माना जाता है। जिससे कई रोगों का निदान भी होता है।
  खास तौर से त्वचा रोगों के लिए यह बेहद लाभकारी माना जाता है। इस स्थान का धार्मिक महत्व भी है। कारण यहां भव्य दिव्य एक शिव मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में भगवान शिव पार्वती संग विराजमान हैं।

   नागरी हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुपति एयरपोर्ट है। तिरुपति एयरपोर्ट से नागरी हिल स्टेशन की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। 
   निकटतम रेलवे स्टेशन रेनीगुंंटा जंक्शन है। रेनीगुंटा रेलवे स्टेशन से नागरी हिल स्टेशन की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नागरी हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
13.319600,79.585800

Sunday, 11 August 2019

पुलवामा हिल स्टेशन: धरती का आभूषण

   पुलवामा हिल स्टेशन को धरती का आभूषण कहा जाना चाहिए। जी हां, पुलवामा हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य किसी आभूषण से कम नहीं है।

   शायद इसी लिए पुलवामा को धरती का गहना कहना चाहिए। भारत के जम्मू एवं कश्मीर प्रांत के पुलवामा को एक शानदार पर्यटन क्षेत्र के तौर पर भी जाना पहचाना जाता है। 

  जम्मू एवं कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित पुलवामा हिल स्टेशन खास तौर से दुग्ध उत्पादन एवं धान के उत्पादन के लिए जाना पहचाना जाता है। शायद इसी लिए पुलवामा हिल स्टेशन कश्मीर का आनन्द एवं कश्मीर का दुधा कुला भी कहा जाता है। 

   समुद्र तल से करीब 1630 मीटर ऊंचाई पर स्थित पुलवामा हिल स्टेशन पर्यटकों को एक मखमली एहसास कराता है। पुलवामा हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका खास तौर से कृषि आधारित है। पुलवामा में खास तौर से चाय, काफी, धान, सेब, बादाम, केसर, अखरोट एवं चेरी की खास उपज होती है।

   लिहाजा पुलवामा हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका केसर, बादाम एवं केसर आदि इत्यादि की सुगंध से लबरेज रहता है। धान उपज की खास गुणवत्ता के कारण पुलवामा हिल स्टेशन को धान का कटोरा भी कहा जाता है। कश्मीर घाटी के श्रीनगर एवं अनन्तनाग राजमार्ग के मध्य स्थित पुलवामा हिल स्टेशन प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत एवं विलक्षण आयाम है।

   पुलवामा हिल स्टेशन प्राकृतिक सौन्दर्य से अति समृद्ध है। लिहाजा इसे धरती का स्वप्न लोक भी कहा जाता है। खूबसूरत नजारों एवं मनमोहक घाटियों वाले पुलवामा हिल स्टेशन की समृद्धता भी अति दर्शनीय है। खास यह कि पुलवामा हिल स्टेशन की खूबसूूरत घाटियां-वादियां पर्यटकों को मुग्ध कर लेतीं हैं। शांत एवं शीतल परिवेश पर्यटकों को यादगार बना देता है।

   खास यह कि इस इलाके की दर्शनीयता का कोई जोड़ नहीं है। पुलवामा हिल स्टेशन एवं आसपास दर्शनीय एवं आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से अहरबल झरना, टारसन एवं मार्सर झील, कुंगवंट्टन, कोनसरनाग झील, अवंतीश्वर मंदिर आदि इत्यादि हैं। इनकी दर्शनीयता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है।
  अहरबल झरना: अहरबल झरना शोपियां से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है। यह झरना पुलवामा हिल स्टेशन एवं आसपास के इलाके को सौन्दर्य युक्त बनाता है। देवदार के घनेे सघन वन क्षेत्र में स्थित अहरबल झरना प्रकृति का एक शानदार एवं सुन्दर उपहार है। 
   टारसर एवं मार्सर झील: टारसर एवं मार्सर झील पुलवामा हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। नागबरन गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित यह झील प्राकृतिक सौन्दर्य की एक सुन्दर गाथा है। वस्तुत: यह पुलवामा हिल स्टेशन की दो सुन्दर झीलें हैं। 
   कुंगवट्टन: कुंगवट्टन वस्तुत: अहरबल से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित एक शानदार घास का मखमली मैदान है। समुद्र तल से करीब 9800 फुट ऊंचाई पर स्थित एक आदर्श पिकनिक स्पॉट भी है।
  कोनसरनाग झील: कोनसरनाग झील पंजाल पहाड़ों के मध्य स्थित एक अति दर्शनीय झील है। समुद्र तल से करीब 4000 मीटर ऊंचाई पर स्थित कोनसरनाग झील शीतलता एक अनुपम उदाहरण है। करीब 3 किलोमीटर लम्बी यह शानदार झील बिजबेहरा के नीचे झेलम में समाहित होती है। 
   अवंतीश्वर मंदिर: अवंतीश्वर मंदिर वस्तुत: पुलवामा हिल स्टेशन का एक अति प्राचीन स्मारक है। यह मंदिर पुलवामा हिल स्टेशन के जौबरी गांव में स्थित है। मान्यता है कि 9 वीं शताब्दी में राजा अवंति ने इसका निर्माण कराया था। यह मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु एवं भगवान शिव को समर्पित है।

   पुलवामा हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट श्रीनगर एयरपोर्ट है। श्रीनगर एयरपोर्ट से पुलवामा हिल स्टेशन की दूरी करीब 21 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बनिहाल जंक्शन है। बनिहाल जंक्शन से पुलवामा हिल स्टेशन की दूरी करीब 54 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पुलवामा हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
33.857110,74.901100

Friday, 9 August 2019

किश्तवार हिल स्टेशन : इन्द्रधनुषी सुन्दरता

   किश्तवार हिल स्टेशन के प्राकृतिक सौन्दर्य को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, पर्यटक किश्तवार के प्राकृतिक सौन्दर्य केे बीच पर्यटक सुध-बुध खो बैठते हैं। 

   खास तौर से किश्तवार हिल स्टेशन एक मुग्ध करने वाला मखमली एहसास कराता है। चौतरफा एक स्वप्नलोक सा परिवेश। भारत के राज्य जम्मू एवं कश्मीर का किश्तवार विशाल चारागाहों के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है। सीना ताने पर्वत शिखर किश्तवार की शान एवं शोभा हैं। वहीं, घाटियां-वादियां किश्तवार का शानदार आभूषण हैं। 

   किश्तवार की घाटियां-वादियां पर्यटकों को एक खास रोमांच से भर देती हैं। समुद्र तल से करीब 1638 मीटर ऊंचाई पर स्थित किश्तवार हिल स्टेशन आैषधीय वनस्पतियों से भी आच्छादित है। लिहाजा पर्यटक सैर सपाटा के साथ ही स्वास्थ्य लाभ के लिए भी किश्तवार हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं। 

  किश्तवार हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण चेनाब नदी है। हालांकि किश्तवार हिल स्टेशन एवं आसपास का समग्र इलाका पीर पंजाल रेंज, ग्रेट हिमालयन रेंज एवं चेनाव नदी की विहंगमता को दर्शित करता है। 

   मौसम कोई भी हो, किश्तवार हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य खास ही नजर आता है। सर्दियों में किश्तवार हिल स्टेशन पर बर्फबारी का भरपूर रोमांचक आनन्द लीजिये। बारिश का मौसम हो तो तन एवं मन को भिगोइये। गर्मियों मेें शांत शीतलता का भरपूर लुफ्त लीजिये।

  किश्तवार हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका केसर की खेती किसानी का है। लिहाजा किश्तवार हिल स्टेशन एवं आसपास केसर की खास सुगंध से लबरेज रहता है। केसर की यह सुगंध पर्यटकों के दिल एवं दिमाग को एक विशेष ताजगी प्रदान करती है। 

   किश्तवार हिल स्टेशन एवं आसपास की विशिष्टताएं वैश्विक पर्यटकों कोे भी आकर्षित करती हैं। पर्वतारोहण का शौक रखने वाले पर्यटकों के लिए किश्तवार हिल स्टेशन किसी स्वर्ग के समान है। 
  वस्तुत: किश्तवार हिल स्टेशन एवं आसपास का इलाका चेनाब नदी का एक सुन्दर पठार है। सुन्दर झीलों एवं झरनों की शान एवं सुन्दरता किश्तवार हिल स्टेशन का एक खास आकर्षण माना जाता है। 

   वस्तुत: देखें तो किश्तवार एक छोटा शहर है लेकिन प्राकृतिक समृद्धता इसे काफी कुछ खास बना देती है। किश्तवार हिल स्टेशन वस्तुत: 400 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला है। इसमें किश्तवार वन्य जीव अभयारण्य भी शामिल है।

   देवदार के सघन वन क्षेत्र किश्तवार हिल स्टेशन की शान एवं शोभा में इन्द्रधनुषी रंग भरते हैं। देवदार के वृक्ष अति दर्शनीय प्रतीत होते हैं। किश्तवार हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण यहां का सीढ़ियों वाला परिदृश्य है। कहीं ऊंचाई वाले पर्वत शिखर हैं तो कहीं घाटियों-वादियों में प्रतिध्वनि का अनुगुंजन है। 

   रोमांचक गतिविधियों का शौक रखने वाले पर्यटकों के लिए किश्तवार हिल स्टेशन एक आदर्श स्थान है। किश्तवार की पर्वत चोटियां पर्यटकों को खास रोमांच से भर देती हैं। समुद्र तल से करीब 6575 मीटर ऊंचाई पर स्थित सिकल मून पर्वत चोटी किश्तवार हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है।

   इसी प्रकार से समुद्र तल से करीब 5630 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुटिल उंगली पर्वत चोटी, करीब 6230 मीटर ऊंचाई पर स्थित अर्जुन पर्वत चोटी एवं करीब 6416 मीटर ऊंचाई पर स्थित ब्राह्मा पर्वत चोटी किश्तवार हिल स्टेशन का खास आकर्षण है। 

   किश्तवार राष्ट्रीय उद्यान: किश्तवार राष्ट्रीय उद्यान खास तौर से देखें तो किश्तवार हिल स्टेशन की आत्मा है। करीब 400 वर्ग किलोेमीटर के दायरे में फैलेे इस राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटक वन्य जीवन के रोमांच का एहसास कर सकते हैं। इस शानदार अभयारण्य में हिम हिरण, तेंदुआ, नील गाय, कस्तूरी मृग आदि इत्यादि देखे जा सकते हैं।

   किश्तवार हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सतवरी एयरपोर्ट है। सतवरी एयरपोर्ट से किश्तवार हिल स्टेशन की दूरी 108 किलोमीटर है। पर्यटक श्रीनगर एयरपोर्ट से भी किश्तवार हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
  श्रीनगर एयरपोर्ट से किश्तवार हिल स्टेशन की दूरी करीब 120 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बनीहाल जंक्शन है। बनीहाल जंक्शन से किश्तवार हिल स्टेशन की दूरी करीब 55 किलोमीटर है। पर्यटक उधमपुर जंक्शन से भी किश्तवार हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं। पर्यटक सड़क मार्ग से भी किश्तवार हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
33.311200,75.769700

Wednesday, 7 August 2019

भद्रवाह हिल स्टेशन : मखमली एहसास

  भद्रवाह हिल स्टेशन को एक शानदार मखमली एहसास कहा जाना चाहिए। जी हां, भद्रवाह का प्राकृतिक सौन्दर्य निश्चय ही मुग्ध कर लेगा। 

  पहाड़ों की शानदार श्रंृखला, घाटियों-वादियों, झीलों-झरनों एवं नदियों से आच्छादित भद्रवाह हिल स्टेशन का सौन्दर्य पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देता है। भारत के जम्मू एवं कश्मीर का यह शानदार एवंं जानदार हिल स्टेशन बेहद रोमांचक है।

   भारत के जम्मू एवं कश्मीर के जिला डोेडा का यह हिल स्टेशन प्राकृतिक सम्पदाओं से परिपूर्ण है। लिहाजा चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की एक निराली आभा पर्यटकों को चकाचौंध करती है। समुद्र तल से करीब 1613 मीटर ऊंचाई पर स्थित भद्रवाह हिल स्टेशन विशाल चारागाहों की खासियत रखता है। 

  सर्दियों में भद्रवाह हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य आैर भी निखर आता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे धरती पर साक्षात स्वर्ग उतर आया हो। सर्दियों में पर्वत चोटियों पर बर्फ का सुन्दर श्रंृगार अति दर्शनीय प्रतीत होता है। चांदनी रात तो जैसे खिल उठती है। आसमान चांद सितारों से भर उठता है। झरनों के शीतल जल में अठखेलियां करना पर्यटकों को खूब भाता है। 

  भद्रवाह हिल स्टेशन सैर सपाटा के साथ ही धार्मिक स्थलों के लिए भी खास तौर से जाना पहचाना जाता है। थंबू नाग मंदिर, नागनी माता मंदिर एवं अलअलबानी मंदिर खास तौर से प्रसिद्ध है। तीज त्योहारों का यहां अपना एक अलग अंदाज है। 

   भद्रवाह हिल स्टेशन हिन्दुओं की पवित्र कैलाश यात्रा के लिए भी जाना पहचाना जाता है। प्रकृति की गोद में रचे-बसे भद्रवाह हिल स्टेशन की अप्रतिम सुन्दरता पर्यटकों पर एक जादू सा कर देती है। पर्यटक भद्रवाह हिल स्टेशन पर रोमांचक हलचल का भरपूर आनन्द उठा सकते हैं। 

   ट्रैकिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए भद्रवाह हिल स्टेशन किसी स्वर्ग से कम नहीं है। जय, केलार, ब्लेईसा, चिंता, चिराला आदि इत्यादि घाटियां ट्रैकिंग के लिए बेहद अच्छी मानी जाती हैं। डोडा जिला का यह शानदार जम्मू से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित है। 


  भद्रवाह हिल स्टेशन एवं आसपास आकर्षक एवं दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से देखें तो चिंता घाटी, सारतीगाल एवं वासुकी नाग मंदिर भद्रवाह हिल स्टेशन के मुख्य आकर्षण हैं। भद्रवाह हिल स्टेशन की यात्रा अक्टूबर से मार्च की अवधि में करनी चाहिए। कारण यह कि यह समयावधि सैर सपाटा के लिए बेहतरीन है।

    चिंता घाटी: चिंता घाटी समुद्र तल से करीब 6500 फुट ऊंचाई पर स्थित एक सुरम्य स्थल है। आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र चिंता घाटी की शान एवं शोभा है। चिंता घाटी का मुख्य आकर्षण थुंबा चोटी है। थुंबा चोटी इस इलाके की सबसे ऊंची चोटी है। इसे भद्रवाह हिल स्टेशन का सबसे ऊंचा हिस्सा भी कह सकते हैं। 

  चिंता घाटी पर भगवान शिव को समर्पित एक दिव्य-भव्य मंदिर भी है। मखमली घास के मैदान चिंता घाटी के सौन्दर्य को आैर भी निखार देते हैं। पर्यटक चिंता घाटी पर घुडसवारी का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। पर्यटक यहां बग्गन से लेकर थुंबा तक घुडसवारी के मजे ले सकते हैं। इसी इलाके में शुब्रानाग चोटी भी है। शुब्रानाग चोटी पर शुब्रानाग मंदिर भी है। यह मंंदिर भगवान शिव को समर्पित है।  
  सारतीगाल: सारतीगाल वस्तुत: भद्रवाह हिल स्टेशन के दक्षिण में स्थित एक आदर्श पिकनिक स्पॉट है। प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज सारतीगाल पर्यटकों को बेहद भाता है। आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित यह क्षेत्र काफी कुछ खास माना जाता है। पर्यटक यहां से कैलाश पर्वत एवं आशापति पहाड़ी का सौन्दर्य निहार सकते हैं। 
  वासुकी नाग मंदिर: वासुकी नाग मंदिर वस्तुत: भद्रवाह हिल स्टेशन का अति प्राचीन धार्मिक स्थान है। मान्यता है कि यह मंदिर 11वीं सदी का है। वासुकी नाग वस्तुत: नागों के देवता माने जाते हैं। नागों के राजा वासुकी नाग के माथे पर नागमणि थी। मंदिर में वासुकी नाग की शानदार प्रतिमा स्थापित है। मान्यता है कि कैलाश यात्रा से पहले वासुकी नाग का पूजन अर्चन करने का प्रावधान है। इसे कैलाश कुण्ड के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। यह स्थान समुद्र तल से करीब 14200 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।
  पाद्री गली: पाद्री गली भद्रवाह हिल स्टेशन का एक अति दर्शनीय एवं खूबसूरत स्थान है। समुद्र तल से करीब 10500 फुट ऊंचाई पर स्थित पाद्री गली एक आदर्श पिकनिक स्पॉट है।
  भद्रवाह हिल स्टेशन से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित पाद्री गली बर्फबारी का क्षेत्र है। बर्फबारी का आनन्द लेने के लिए पर्यटकों को पाद्री गली की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। पर्यटक यहां प्रकृति की गोद में घुडसवारी का भरपूर अानन्द ले सकते हैं।
  भद्रवाह हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जम्मू है। जम्मू एयरपोर्ट से भद्रवाह हिल स्टेशन की दूरी करीब 200 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी भद्रवाह हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
33.144600,75.546200

Tuesday, 6 August 2019

डल झील : धरती का स्वर्ग

   डल झील को श्रीनगर का आभूषण कहना चाहिए। जी हां, धरती पर कहीं स्वर्ग है तो वह श्रीनगर है। डल झील को श्रीनगर की आत्मा भी कहा जाता है। 

   यूं भी कहा जा सकता है कि स्वर्ग से भी सुन्दर श्रीनगर है। डल झील को श्रीनगर का मुकुट अर्थात ताज भी कहा जा सकता है। भारत के राज्य जम्मू-कश्मीर के शहर श्रीनगर की यह सुन्दर झील वैश्विक स्तर पर खास प्रसिद्ध है। विशेषज्ञों की मानें तो डल झील कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी झील है।

   समुद्र तल से करीब 1583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित डल झील प्राकृतिक सौन्दर्य की एक शानदार संरचना है। करीब 26 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैली यह सुरम्य झील अपने खास सौन्दर्य से देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है। 

   इस शानदार झील की लम्बाई 7.44 किलोमीटर आैर चौड़ाई 3.50 किलोमीटर है। जलक्रीड़ा आैर जल आधारित खेलों के लिए डल झील एक अति दर्शनीय एवं आदर्श है। वस्तुत: देखें तो डल झील जम्मू-कश्मीर का मुख्य आकर्षण है। 
  हिमालय की गोद में स्थित डल झील का अपना एक आकर्षण है। वस्तुत: डल झील पर शिकारा एवं हाउसबोट में कुछ पल गुजारना पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचक होता है। 

  शिकारा एवं हाउसबोट पर डल झील की सैर करना एक अप्रतिम आनन्द की अनुभूति कराती है। चौतरफा पर्वतीय सौन्दर्य से आलोकित डल झील की शान एवं शोभा चांदनी रात में आैर भी अधिक निखर आती है। डल झील की यात्रा पर पर्यटक एहसास करते हैं कि जैसे प्राकृतिक सौन्दर्य गोद में उतर आया हो। 

   पर्यटक डल झील में पानी के खेलों का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। पर्यटक डल झील में स्विमिंग, वॉटर सर्फिंग, कायाकिंग, एेंगलिंग एवं कैनोइंग आदि खेलों का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। डल झील से सूर्योदय एवं सूर्यास्त का रोमांचक दृश्य की दर्शनीयता पर्यटकों कोे प्रफुल्लित कर देती है। 

   खास यह कि डल झील तीन दिशाओें से पहाड़ियों से घिरी है। खास यह कि डल झील के चार जल सोत हैं। इन सोतों से ही डल झील में जल आता है। इसके साथ ही कई अन्य झीलें भी डल झील में समाहित होती हैं। इसके मुख्य चार जलाशय में गगरीबल, लोकुट डल, बोड डल एवं नागिन हैं। 

   खास यह है कि लोकुट डल के मध्य में एक सुन्दर द्वीप स्थित है। इस द्वीप को रुपलंक के नाम से जाना पहचाना जाता है। बोड डल की जलधारा के मध्य सोनालंक द्वीप स्थित है। विशिष्टताओं एवं प्राकृतिक सौन्दर्य की शानदार आभा के कारण डल झील भारत की सबसे सुन्दर झीलों में है। 

   मुगल वाटिका भी डल झील का एक अप्रतिम सौन्दर्य है। इस अप्रतिम सौन्दर्य के मध्य पर्यटकों को शिकारा एव हाउस बोट में एक रात अवश्य गुजारनी चाहिए। नेहरू पार्क, कानुटुुर खाना, चारमीनारी, रुपलंक द्वीप, सोनालंक द्वीप एवं हजरत बल की सैर अवश्य करनी चाहिए।

   खास यह कि शिकारा पर ही डल झील में शानदार बाजार भी लगते हैं। शिकारा पर सवार होकर पर्यटक खरीदारी भी कर सकते हैं। जल आधारित वनस्पतियां डल झील की शान एवं शोभा हैं।

  यह आैषधीय वनस्पतियां इस झील की सुन्दरता में चार चांद लगा देती हैं। कमल के फूल, पानी में बहती कुमुदनी आदि इत्यादि अति दर्शनीय प्रतीत होते हैं। डल झील पर सैलानियों के मनोरंजन के अगाध संसाधन उपलब्ध हैं।

   इन विशिष्टताओं के कारण ही डल झील को प्रकृति का शानदार उपहार कहा जा सकता है। डल झील की यात्रा खास तौर से बारिश के मौसम को छोड़ कर कभी भी की जा सकती है। हालांकि बारिश के मौसम में डल झील के सैर सपाटे का अपना एक अलग ही आनन्द होता है।


   श्रीनगर स्थित डल झील की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी श्रीनगर स्थित डल झील की यात्रा कर सकते हैं।
34.127390,74.841700

फागू हिल स्टेशन: रोमांचक एहसास    फागू हिल स्टेशन निश्चय ही दिल एवं दिमाग को एक सुखद शांति एवं शीतलता प्रदान करेगा। फागू हिल स्टेशन आकार...